JSSC-CGL पेपर लीक केस में बड़ा दावा, 15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख लेने का आरोप
खबर का सारांश
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान CID पूछताछ में कई गंभीर दावे सामने आए हैं। परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TDPL के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने कथित तौर पर JSSC-CGL परीक्षा का पेपर लीक होने और अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेने की जानकारी दी है। दावा है कि बोकारो में 15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये लिए गए और परीक्षा से पहले उन्हें 65 सवालों के जवाब तैयार कराए गए। हालांकि, इन दावों की CID ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जांच एजेंसी कथित पेपर लीक और परीक्षा संचालन से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।
CID पूछताछ में पेपर लीक का कथित दावा
JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही CID के सामने अभय तिवारी ने सितंबर 2024 में हुई परीक्षा को लेकर कई अहम दावे किए हैं। पूछताछ के दौरान उन्होंने कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध होने की बात कही। उनके दावे के अनुसार कुछ अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके उत्तर तैयार कराए गए थे। हालांकि, जांच एजेंसी की ओर से इन दावों को अभी प्रमाणित नहीं किया गया है। ऐसे में मामले में सामने आई जानकारी को फिलहाल जांच के दावों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये लेने का आरोप
पूछताछ से जुड़े सूत्रों के अनुसार अभय तिवारी ने दावा किया कि बोकारो में 15 अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 12-12 लाख रुपये लिए गए थे। यानी बड़ी रकम के बदले परीक्षा में मदद और चयन का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई है। यह भी दावा किया गया कि परीक्षा से पहले करीब 65 सवाल और उनके जवाब अभ्यर्थियों को तैयार कराए गए। यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के साथ होने वाली कथित धोखाधड़ी से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है। फिलहाल CID दावों की पुष्टि के लिए साक्ष्य जुटा रही है।
परीक्षा संचालन एजेंसी भी जांच के घेरे में
मामले की जांच केवल अभ्यर्थियों और कथित पेपर लीक तक सीमित नहीं है। परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों की भूमिका भी CID की जांच के दायरे में बताई जा रही है। TDPL को पहले JSSC की परीक्षाओं के संचालन का काम मिलता था, लेकिन बाद में कंपनी के काम से हटने के बाद दूसरी एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद प्रश्नपत्र की छपाई, परीक्षा संचालन और कथित पेपर लीक के बीच संभावित कनेक्शन की जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया में कहीं कोई संगठित नेटवर्क सक्रिय तो नहीं था।
वेबेल एजेंसी से जुड़े लोगों की भूमिका पर भी नजर
पूछताछ में अभय तिवारी ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसी वेबेल से जुड़े कुछ लोगों का भी जिक्र किया है। उनके दावे के मुताबिक कुछ संबंधित लोग कथित घटनाक्रम के दौरान मौजूद थे। हालांकि, इस दावे की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। CID अब यह जांच कर रही है कि प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर उसके सुरक्षित रखे जाने और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने की प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता हुई या नहीं। जांच में सामने आने वाले दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य और अन्य सबूत ही इन आरोपों की वास्तविकता तय करेंगे।
अभय तिवारी पहले TDPL में कर चुके हैं काम
जांच के मुताबिक अभय तिवारी सरकारी सेवा में आने से पहले परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी TDPL में काम कर चुके थे। बाद में वह गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट प्रखंड में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर तैनात रहे। CID ने उन्हें 22 जुलाई को गिरफ्तार किया था। इसके बाद से वह जांच एजेंसी की रिमांड में हैं और उनसे JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच के दौरान उनकी पूर्व नौकरी, परीक्षा संबंधी अनुभव और प्रतियोगी परीक्षाओं में उनकी कथित सफलता से जुड़े पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।
परिवार के सदस्यों की नियुक्तियां भी जांच के दायरे में
मामले में अभय तिवारी के परिवार से जुड़े कुछ सदस्यों की सरकारी नौकरी में नियुक्तियों की भी जांच किए जाने की बात सामने आई है। जांच से जुड़े आरोपों में कहा गया है कि उनके भाई और पत्नी ने भी प्रतियोगी परीक्षाओं के माध्यम से सरकारी नौकरी हासिल की। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन नियुक्तियों में परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के अनुरूप थी या नहीं। इसके अलावा परिवार के अन्य सदस्यों की नियुक्तियों और उनकी परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। हालांकि, इन नियुक्तियों को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी।
गारंटीड सिलेक्शन के नाम पर 25 से 40 लाख लेने का आरोप
अभय तिवारी पर अभ्यर्थियों को परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर बड़ी रकम लेने के भी गंभीर आरोप हैं। जांच से जुड़े दावों के अनुसार कुछ अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 25 से 40 लाख रुपये तक लिए जाने और चयन की गारंटी देने की बात सामने आई है। यदि जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह केवल पेपर लीक का मामला नहीं रहेगा, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में संगठित तरीके से अभ्यर्थियों को निशाना बनाने वाले नेटवर्क की ओर भी इशारा करेगा। फिलहाल CID पैसों के लेन-देन और आरोपों से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है।
CID के सामने अब सबसे बड़ा सवाल नेटवर्क का
JPSC-JSSC परीक्षा प्रकरण में CID अब कथित पेपर लीक के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि प्रश्नपत्र तक कथित पहुंच कैसे बनी, अभ्यर्थियों से संपर्क किस माध्यम से हुआ और पैसों का लेन-देन किन लोगों के बीच हुआ। साथ ही परीक्षा संचालन और प्रश्नपत्र की छपाई से जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। अभय तिवारी के दावों की पुष्टि जांच में मिलने वाले ठोस साक्ष्यों से ही होगी। फिलहाल मामले में जांच जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना है।