US Tariffs: चीन के बाद भारत पर भी अमेरिका की नजर, 40 से ज्यादा देशों की सूची में नाम
अमेरिका और चीन के बीच टैरिफ को लेकर जारी तनाव का असर अब भारत पर भी पड़ता नजर आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने भारत को उन 40 से अधिक देशों की सूची में शामिल किया है, जिनके जरिए चीनी सामान अमेरिकी टैरिफ से बचकर अमेरिका पहुंचने का संभावित जोखिम जताया गया है। इस घटनाक्रम से भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में नई चुनौती पैदा हो सकती है। हालांकि, सूची में शामिल होना अपने आप में भारत पर किसी नए टैरिफ या प्रतिबंध का आदेश नहीं है।
चीन के सामान को लेकर अमेरिका ने जताई चिंता
अमेरिकी प्रशासन की चिंता मुख्य रूप से उन कारोबारियों और निर्यातकों को लेकर है, जो कथित तौर पर चीन में बने उत्पादों को किसी तीसरे देश के रास्ते अमेरिकी बाजार तक पहुंचा सकते हैं। इसके पीछे उद्देश्य चीन पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ से बचना बताया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का मानना है कि कुछ देशों के जरिए सामान की शिपमेंट का रास्ता बदला जा सकता है या उत्पादों की री-लेबलिंग की जा सकती है। ऐसे मामलों में वास्तविक उत्पाद की उत्पत्ति छिपाने की कोशिश किए जाने की आशंका जताई गई है।
भारत भी 40 से ज्यादा देशों की सूची में शामिल
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को भी उन 40 से अधिक देशों में शामिल किया गया है, जिन्हें अमेरिका ने संभावित ट्रांसशिपमेंट जोखिम के संदर्भ में चिन्हित किया है। ट्रांसशिपमेंट का मतलब broadly किसी सामान को उसके मूल देश से सीधे अंतिम बाजार भेजने के बजाय किसी तीसरे देश के रास्ते भेजना होता है। अमेरिका को आशंका है कि ऐसी व्यवस्था का इस्तेमाल चीनी उत्पादों पर लागू टैरिफ से बचने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि भारत सरकार या सभी भारतीय निर्यातकों पर अमेरिका ने कोई आरोप लगाया है।
री-लेबलिंग और गलत जानकारी पर अमेरिका की नजर
व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ ट्रेड एंड मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी की रिपोर्ट में कथित तौर पर ऐसे तरीकों का उल्लेख किया गया है, जिनके जरिए चीनी सामान को तीसरे देशों के माध्यम से अमेरिकी बाजार में पहुंचाया जा सकता है। इनमें शिपमेंट का रास्ता बदलना, उत्पादों की री-लेबलिंग और सामान के मूल देश के बारे में गलत जानकारी देना शामिल है। अमेरिकी प्रशासन ऐसे मामलों को लेकर सतर्कता बढ़ा रहा है, क्योंकि इससे उसके टैरिफ सिस्टम की प्रभावशीलता प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से तीसरे देशों के जरिए होने वाले व्यापार पर भी निगरानी बढ़ाई जा रही है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर पड़ सकता है असर
भारत का नाम इस सूची में आने से दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता में एक नया संवेदनशील मुद्दा जुड़ सकता है। भारत लंबे समय से अमेरिका के साथ व्यापार और टैरिफ संबंधी मुद्दों पर बातचीत कर रहा है। ऐसे में यदि वॉशिंगटन भारतीय रास्ते से चीनी सामान के संभावित प्रवेश को लेकर अतिरिक्त जांच करता है, तो भारतीय निर्यातकों के लिए अनुपालन और दस्तावेजी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हो सकती हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस सूची के आधार पर भारत के खिलाफ कोई तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी या नहीं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
भारत के लिए अमेरिका एक प्रमुख निर्यात बाजार है। ऐसे में अमेरिकी व्यापार नीतियों में होने वाला बदलाव भारतीय कंपनियों पर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से असर डाल सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में जहां भारत और चीन से आने वाले उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करते हैं। यदि अमेरिका भारतीय शिपमेंट की जांच बढ़ाता है तो निर्यातकों को उत्पाद के मूल देश, सप्लाई चेन और दस्तावेजों को लेकर अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करनी पड़ सकती है। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत इस अमेरिकी चिंता का किस तरह जवाब देता है।