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ईरान मुद्दे पर अमेरिका-सऊदी रिश्तों में दरार? रिपोर्ट में बड़े दावे, हथियार रोकने की चेतावनी का भी जिक्र

अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्तों में ईरान नीति को लेकर नए मतभेद सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के खिलाफ प्रस्तावित अमेरिकी सैन्य अभियान को लेकर दोनों देशों के बीच गंभीर असहमति हुई। दावा है कि सऊदी अरब ने अपने सैन्य ठिकानों और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति नहीं दी, जिसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने हथियार आपूर्ति रोकने जैसी चेतावनी दी। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ऑपरेशन को लेकर बढ़ा दोनों देशों के बीच विवाद

एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और सऊदी अरब के बीच ईरान से जुड़े एक प्रस्तावित सैन्य अभियान को लेकर मतभेद गहरा गए। बताया गया कि अमेरिकी प्रशासन चाहता था कि सऊदी अरब अपने सैन्य अड्डों और हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति दे, लेकिन रियाद ने इससे इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ने की बात कही जा रही है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अमेरिका या सऊदी अरब की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

रिपोर्ट में हथियारों की आपूर्ति रोकने की चेतावनी का दावा

रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के रुख से नाराज अमेरिकी प्रशासन ने रियाद को मिसाइल इंटरसेप्टर और ड्रोन रोधी प्रणालियों की आपूर्ति रोकने की चेतावनी दी। दावा किया गया कि इन रक्षा प्रणालियों की सऊदी अरब की सुरक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इस संबंध में कोई औपचारिक निर्णय लिया गया या नहीं। इसलिए इन दावों को फिलहाल मीडिया रिपोर्टों के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

अमेरिकी सैन्य रणनीति में बदलाव की चर्चा

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा गया कि वॉशिंगटन अब सऊदी अरब में अपनी कुछ सैन्य मौजूदगी कम करने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिका उन सहयोगी देशों पर अधिक ध्यान देना चाहता है, जिन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा अभियानों के दौरान सक्रिय सहयोग दिया। हालांकि इस संबंध में भी अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर सऊदी की अलग राय

सूत्रों के अनुसार, सऊदी अरब शुरू से ही ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ाने और बंदरगाहों की नाकेबंदी जैसे कदमों को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए था। रियाद का मानना था कि इस तरह की कार्रवाई से पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। इसी वजह से उसने अमेरिका से बातचीत और कूटनीतिक समाधान पर जोर देने की सलाह दी थी। रिपोर्ट में कहा गया कि सऊदी नेतृत्व ने सैन्य कार्रवाई के बजाय संवाद का रास्ता अपनाने की वकालत की।

क्राउन प्रिंस ने पुनर्विचार की सलाह दी थी

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman ने अमेरिकी नेतृत्व से प्रस्तावित अभियान पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया था। उनका मानना था कि इससे ईरान के साथ टकराव और गहरा सकता है तथा क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है। हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन ने इस सलाह को स्वीकार नहीं किया और अपनी रणनीति पर आगे बढ़ने का फैसला किया।

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