स्विट्जरलैंड वार्ता के बाद ईरान का बड़ा दावा, अराघची ने गिनाए संभावित फायदे
स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता के पहले दौर के बाद ईरान ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि बातचीत के परिणामस्वरूप तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में राहत मिली है और क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में प्रगति हुई है।
वार्ता के बाद ईरान ने जताया संतोष
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के पहले दौर को सकारात्मक बताते हुए कहा कि इससे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्रगति देखने को मिली है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जारी बयान में दावा किया कि ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात से जुड़े प्रतिबंधों में राहत दी गई है। हालांकि इन दावों पर अभी अन्य पक्षों की ओर से विस्तृत आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता का किया जिक्र
अराघची ने अपने बयान में पाकिस्तान और कतर की भूमिका की सराहना की। उनका कहना है कि दोनों देशों की लगातार मध्यस्थता से क्षेत्रीय तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने में मदद मिली है। ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, इन प्रयासों ने लेबनान से जुड़े मुद्दों पर भी संवाद को नई दिशा दी है और कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को मजबूत किया है।
लेबनान के लिए डी-कॉन्फ्लिक्शन तंत्र पर सहमति का दावा
ईरानी पक्ष के अनुसार, अमेरिका और ईरान लेबनान में सैन्य गतिविधियों की निगरानी और संभावित टकराव को रोकने के लिए एक “डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल” बनाने पर सहमत हुए हैं। हालांकि इस प्रस्तावित तंत्र की संरचना, अधिकार क्षेत्र और संचालन प्रक्रिया को लेकर अभी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा मिल सकता है।
कई अहम मुद्दों पर बने कार्य समूह
संयुक्त बयानों के अनुसार, वार्ता के पहले चरण के बाद परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों, विवाद समाधान और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषयों पर कार्य समूहों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। इसके अलावा एक उच्चस्तरीय समिति के गठन का भी प्रस्ताव रखा गया है, जो बातचीत की प्रक्रिया की निगरानी करेगी और भविष्य के एजेंडे को तय करने में भूमिका निभाएगी।
60 दिनों में व्यापक समझौते की उम्मीद
रिपोर्टों के मुताबिक, सभी पक्ष अगले 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हुए हैं। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित समुद्री आवाजाही और किसी भी गलतफहमी से बचने के लिए समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि बातचीत इसी दिशा में आगे बढ़ती है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिरता पर भी पड़ सकता है।