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US-Iran Deal: ईरान को 300 अरब डॉलर कौन देगा? खाड़ी देशों से जवाब मांगेंगे ट्रंप के दूत

ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) में ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की योजना का उल्लेख होने के बाद खाड़ी देशों में नई चिंताएं पैदा हो गई हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी बड़ी राशि कौन देगा और इसके बदले ईरान को क्या शर्तें माननी होंगी।

तीन देशों के दौरे पर जा रहे हैं मार्को रूबियो

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो तीन दिन के मध्य पूर्व दौरे पर संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन के नेताओं से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान वह अमेरिका के सहयोगी देशों को भरोसा दिलाने की कोशिश करेंगे कि तेहरान के साथ होने वाली किसी भी डील से उनके सुरक्षा हित प्रभावित नहीं होंगे।

हालांकि, खाड़ी देशों की चिंता इस बात को लेकर है कि अगर समझौता सफल हुआ तो ईरान को आर्थिक और रणनीतिक रूप से कितना लाभ मिलेगा।

300 अरब डॉलर की योजना में क्या है?

ईरान और अमेरिका के बीच तैयार किए गए समझौता ज्ञापन के अनुसार, वाशिंगटन अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की एक सहमति आधारित योजना तैयार करेगा।

इस योजना के वित्तीय ढांचे और फंडिंग के तरीके को अंतिम समझौते के 60 दिनों के भीतर तय किया जाना है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पूरी राशि अमेरिका देगा, खाड़ी देश योगदान करेंगे या फिर इसमें अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों की भूमिका होगी।

खाड़ी देशों को किस बात का डर?

सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन और कतर जैसे देशों को आशंका है कि इतना बड़ा आर्थिक पैकेज ईरान को युद्ध के बाद तेजी से पुनर्निर्माण करने और क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने का मौका दे सकता है।

इन देशों की एक और चिंता यह है कि मौजूदा समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। ऐसे में उन्हें डर है कि आर्थिक मजबूती के बाद तेहरान अपनी सैन्य क्षमताओं को और बढ़ा सकता है।

अमेरिकी सैन्य ठिकानों वाले देश सबसे ज्यादा चिंतित

खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। हालिया संघर्ष के दौरान इन देशों को ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना भी करना पड़ा था। इसलिए वे जानना चाहते हैं कि अमेरिका ईरान को क्या रियायतें देने जा रहा है और बदले में उससे कौन-कौन सी प्रतिबद्धताएं ली जाएंगी।

फ्रीज की गई संपत्तियों पर भी बहस

समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ईरान की विदेशों में जमा और प्रतिबंधों के कारण रोकी गई अरबों डॉलर की संपत्तियों से जुड़ा है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिया था कि यदि प्रतिबंधों में ढील दी जाती है तो इन संपत्तियों को चरणबद्ध तरीके से जारी करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।

अमेरिका का कहना है कि वह यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यह पैसा ईरान के लोगों के कल्याण और आर्थिक विकास में इस्तेमाल हो, न कि सैन्य गतिविधियों या आतंकवादी संगठनों के समर्थन में।

अभी कई सवालों के जवाब बाकी

हालांकि, सबसे अहम सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं—300 अरब डॉलर का वास्तविक स्रोत क्या होगा, इसकी निगरानी कौन करेगा और ईरान पर कौन-सी शर्तें लागू होंगी। माना जा रहा है कि आने वाले हफ्तों में इन मुद्दों पर अमेरिका और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच गहन बातचीत होगी।

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