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ईरान डील के बाद भी शहबाज की शेखी बरकरार, पाकिस्तान की भूमिका पर उठे सवाल

ईरान-अमेरिका अंतरिम समझौते के बाद पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नई बहस छिड़ गई है। जिस मध्यस्थता को इस्लामाबाद अपनी बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में पेश कर रहा था, उसी प्रक्रिया में अंतिम समझौते के दौरान पाकिस्तान की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संसद में पाकिस्तान की भूमिका का बचाव करते हुए इसे वैश्विक सम्मान से जोड़कर पेश किया।

संसद में शहबाज शरीफ ने गिनाईं पाकिस्तान की उपलब्धियां

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संसद में अपने संबोधन के दौरान दावा किया कि ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका से देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ी है। उन्होंने कहा कि कई देश वर्षों से जिस सम्मान की तलाश में रहे, वह पाकिस्तान को मिला है। अपने भाषण में उन्होंने भारत, जापान, सऊदी अरब और मलेशिया जैसे देशों का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा समय में पाकिस्तान का नाम वैश्विक स्तर पर सम्मान के साथ लिया जा रहा है।

अंतिम समझौते में पाकिस्तान की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय

राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में इस बात को लेकर चर्चा है कि जिस प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका की बात की जा रही थी, उसी के अंतिम चरण में इस्लामाबाद को प्रमुख स्थान नहीं मिला। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व को उम्मीद थी कि समझौते से जुड़े कार्यक्रमों में उन्हें महत्वपूर्ण भूमिका मिलेगी, लेकिन अंतिम हस्ताक्षर अलग मंच पर हुए। इससे पाकिस्तान के भीतर विपक्ष और विश्लेषकों के बीच बहस तेज हो गई है कि क्या इस्लामाबाद अपनी भूमिका को वास्तविकता से अधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है।

भारत की विदेश नीति पर उठे सवालों के बीच बदला माहौल

जब ईरान-अमेरिका वार्ता में पाकिस्तान की सक्रियता की खबरें सामने आई थीं, तब भारत की विदेश नीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को लेकर विपक्ष और कुछ विश्लेषकों ने सवाल उठाए थे। हालांकि बाद के घटनाक्रमों के बाद राजनीतिक विमर्श का रुख बदलता नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में किसी एक देश की भूमिका कई स्तरों पर तय होती है और अंतिम परिणाम अक्सर पर्दे के पीछे हुई कई प्रक्रियाओं का नतीजा होता है।

कतर की भूमिका को भी माना जा रहा अहम

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में कतर ने अपेक्षाकृत शांत लेकिन प्रभावी भूमिका निभाई। कूटनीतिक मामलों के जानकारों का कहना है कि कई बार सार्वजनिक बयानबाजी से ज्यादा महत्व पर्दे के पीछे चलने वाली वार्ताओं का होता है। इसी वजह से क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग और संवाद को लेकर नए समीकरण उभरते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले समय में इस समझौते के व्यापक प्रभावों पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

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