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सरिस्का बफर एरिया में बाघों की बढ़ती संख्या, 2 साल में 11 पहुंचे; कोर एरिया विस्तार की मांग तेज

अलवर स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व के बफर एरिया में बाघों की संख्या तेजी से बढ़कर दो वर्षों में 11 तक पहुंच गई है। बाला किला, अंधेरी और किशनकुंड जैसे इलाकों में बाघों का लगातार मूवमेंट देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आबादी को देखते हुए इस पूरे क्षेत्र को कोर एरिया में शामिल कर सुरक्षा और मॉनिटरिंग को मजबूत करने की जरूरत है।

बफर एरिया बना बाघों का नया बसेरा

सरिस्का का बफर जोन अब बाघों के लिए सुरक्षित और अनुकूल क्षेत्र साबित हो रहा है। यहां एसटी-18, एसटी-19, एसटी-31 और एसटी-2302 समेत कई बाघ और उनके शावक लगातार विचरण कर रहे हैं। बाला किला क्षेत्र के मुख्य मार्ग तक बाघों की मौजूदगी दर्ज की जा रही है। शिकार और प्राकृतिक गतिविधियों के लिए यह क्षेत्र अब तेजी से विकसित होता बाघों का नया ठिकाना बन गया है।

दो साल में बढ़कर 11 हुई बाघों की संख्या

जानकारी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में सरिस्का के बफर क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। इसमें शावकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि घना जंगल और बेहतर पर्यावरणीय स्थिति इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण है। इससे यह क्षेत्र वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से और अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है।

कोर एरिया विस्तार की उठी मांग

वन्यजीव विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों का कहना है कि अब बफर एरिया को कोर एरिया में बदलने की आवश्यकता है। इससे बाघों की सुरक्षा और बेहतर निगरानी संभव होगी। मानवीय दखल और मवेशियों की आवाजाही को नियंत्रित करना भी जरूरी बताया गया है। इससे बाघों की टेरिटरी संघर्ष की समस्या को भी कम किया जा सकेगा।

इलाका कम पड़ने से बढ़ सकता है टकराव

बाघों की संख्या बढ़ने के साथ जंगल का इलाका अब कम पड़ने लगा है। आने वाले समय में शावक वयस्क होकर अपनी टेरिटरी बनाएंगे, जिससे बाघों के बीच संघर्ष की आशंका बढ़ सकती है। साथ ही अन्य वन्यजीवों, खासकर तेंदुओं के लिए भी जगह सीमित होती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरिस्का का विस्तार समय की जरूरत है।

सरिस्का का ऐतिहासिक महत्व

सरिस्का को 1955 में वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा मिला था और 1978 में इसे प्रोजेक्ट टाइगर के तहत टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। पहले यह क्षेत्र अत्यंत समृद्ध था, लेकिन समय के साथ जंगल कम होता गया। अब फिर से यह क्षेत्र समृद्ध हो रहा है और बाघों की वापसी इसे एक बार फिर प्रमुख टाइगर रिजर्व बना रही है।

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