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अमेरिकी-भारत बयान विवाद: ओमान तट हमले पर तिवारी का हमला

ओमान तट के पास हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद गहराता जा रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बयान पर अब कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तिवारी ने कहा कि जिस देश को अमेरिका अपना “दोस्त” बताता है, उसके प्रति ऐसी कठोर और असंवेदनशील भाषा का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पूरे मामले ने भारत-अमेरिका कूटनीतिक रिश्तों और समुद्री सुरक्षा नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

अमेरिकी विदेश मंत्री के बयान पर कड़ी आपत्ति

मनीष तिवारी ने कहा कि मार्को रुबियो के बयान में न तो किसी तरह का अफसोस दिखा और न ही संवेदना। उनके अनुसार, बयान का लहजा टकराव पैदा करने वाला था और इससे यह संदेश गया कि घटनाओं की जिम्मेदारी भारतीय नाविकों पर डाली जा रही है। तिवारी ने सवाल उठाया कि यदि भारत को अमेरिका अपना रणनीतिक साझेदार मानता है, तो फिर ऐसी भाषा का उपयोग क्यों किया गया। उन्होंने इसे कूटनीतिक संबंधों की मर्यादा के खिलाफ बताया और इसे गंभीरता से लेने की जरूरत पर जोर दिया।

“क्या सच में भारत अमेरिका का दोस्त है?”—कांग्रेस का सवाल

कांग्रेस नेता ने तीखे शब्दों में कहा कि इस तरह की भाषा किसी दोस्त देश के खिलाफ नहीं बोली जाती। उन्होंने कहा कि यह बयान भारत-अमेरिका रिश्तों की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़ा करता है। तिवारी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी बयान का मतलब यह निकलता है कि घटना के लिए भारतीय पक्ष को ही जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। उन्होंने इसे “दोस्ती की परिभाषा के विपरीत व्यवहार” बताया और कहा कि ऐसे मामलों में अधिक संतुलित और संवेदनशील रुख अपनाया जाना चाहिए।

जयशंकर से बातचीत का ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग

मनीष तिवारी ने विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर से इस पूरे संवाद का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता जरूरी है ताकि देश को यह समझ में आ सके कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का पक्ष किस तरह रखा जा रहा है। तिवारी ने आरोप लगाया कि वर्तमान स्थिति में विदेश नीति को लेकर स्पष्टता की कमी दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा के मुद्दे पर अधिक सख्त और स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।

होर्मुज जलडमरूमध्य और कमर्शियल शिपिंग विवाद

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, मार्को रुबियो ने भारतीय विदेश मंत्री से बातचीत में कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में सभी कमर्शियल जहाजों को अमेरिकी आदेशों का पालन करना होगा। साथ ही उन्होंने हालिया घटनाओं पर चर्चा करते हुए सुरक्षा बनाए रखने की बात कही। अमेरिका ने अवैध तेल परिवहन और सुरक्षा उल्लंघन को लेकर सख्त चेतावनी भी दी। इस बयान के बाद समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अधिकारों को लेकर तनाव और बढ़ गया है।

भारत की आपत्ति और आगे की कूटनीतिक चुनौती

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी हमलों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि तीन भारतीय नाविकों की मौत बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कमर्शियल शिपिंग पर ऐसी कार्रवाई को अनुचित बताया। भारत की ओर से इस मुद्दे को उच्च स्तर पर उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भारत-अमेरिका संबंधों में एक नई कूटनीतिक चुनौती बन सकता है, जहां दोनों देशों को संतुलन बनाकर आगे बढ़ना होगा।

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