इजरायल को 3.3 अरब डॉलर की अमेरिकी सैन्य सहायता पर घमासान, संसद में संशोधन प्रस्ताव से बढ़ी सियासी बहस
अमेरिका में इजरायल को दी जाने वाली वार्षिक सैन्य सहायता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में एक संशोधन प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसमें इजरायल को मिलने वाली करीब 3.3 अरब डॉलर की सैन्य सहायता रोकने की मांग की गई है। इस प्रस्ताव का समर्थन और विरोध दोनों ही दलों के सांसद कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी राजनीति में इस मुद्दे पर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
क्या है 3.3 अरब डॉलर की सैन्य सहायता रोकने का प्रस्ताव?
यह प्रस्ताव अमेरिकी संसद में विदेश विभाग और विदेशी अभियानों से जुड़े बजट विधेयक में संशोधन के रूप में पेश किया गया है। इसमें इजरायल को हर वर्ष दी जाने वाली लगभग 3.3 अरब डॉलर की सैन्य सहायता समाप्त करने की मांग की गई है। प्रस्ताव में उन रक्षा कार्यक्रमों का भी उल्लेख है, जिनके तहत इजरायल को अमेरिकी सुरक्षा सहयोग मिलता है। हालांकि यह अभी केवल एक प्रस्ताव है और इसे कानून बनने के लिए संसदीय प्रक्रिया से गुजरना होगा।
रो खन्ना और थॉमस मैसी ने रखा प्रस्ताव
इस संशोधन को डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना और रिपब्लिकन सांसद थॉमस मैसी ने मिलकर पेश किया है। दोनों सांसदों का कहना है कि अमेरिकी सैन्य सहायता के इस्तेमाल और उससे जुड़े मानवीय प्रभावों पर व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए। वहीं डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर ने भी सार्वजनिक रूप से इस प्रस्ताव का समर्थन करने की घोषणा की है और सोशल मीडिया पर इजरायल की नीतियों की आलोचना की है।
डेमोक्रेटिक पार्टी में सामने आए मतभेद
इस प्रस्ताव ने डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर भी अलग-अलग राय को उजागर कर दिया है। हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ्रीज ने संशोधन का विरोध करते हुए कहा कि इससे इजरायल की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर असर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने पार्टी सांसदों को अपनी अंतरात्मा के अनुसार मतदान करने की स्वतंत्रता दी है, जिससे यह स्पष्ट है कि इस मुद्दे पर पार्टी के भीतर एकमत राय नहीं है।
समर्थन और विरोध के अपने-अपने तर्क
प्रस्ताव के समर्थकों का कहना है कि अमेरिकी सहायता के उपयोग और उससे जुड़े मानवीय पहलुओं पर पुनर्विचार होना चाहिए। वहीं विरोध करने वाले सांसदों का तर्क है कि इजरायल अमेरिका का प्रमुख रणनीतिक सहयोगी है और सुरक्षा सहायता क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है। उनका यह भी कहना है कि सहायता में कटौती का असर सुरक्षा सहयोग और अन्य मानवीय कार्यक्रमों पर भी पड़ सकता है।
अब मतदान पर टिकी हैं नजरें
इस संशोधन प्रस्ताव पर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में मतदान होना है। मतदान के नतीजे से यह तय होगा कि प्रस्ताव आगे की संसदीय प्रक्रिया में बढ़ेगा या नहीं। फिलहाल इस मुद्दे ने अमेरिकी राजनीति में इजरायल नीति, विदेश नीति और रक्षा सहायता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।