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भीलवाड़ा में 6 दिन में 5 प्रसूताओं की मौत से मचा बवाल, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल, सियासत हुई तेज

भीलवाड़ा में 6 दिन में 5 प्रसूताओं की मौत, सियासत तेज

राजस्थान में सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। भीलवाड़ा में छह दिनों के भीतर पांच और बांसवाड़ा में एक ही दिन दो प्रसूताओं की मौत के बाद मामला राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्ष ने सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि अस्पताल प्रशासन ने मौतों का कारण प्रसूति संबंधी जटिलताएं बताया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग तेज हो गई है।

भीलवाड़ा में छह दिन में पांच प्रसूताओं की मौत

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 5 जुलाई से 10 जुलाई के बीच पांच प्रसूताओं की मौत दर्ज की गई। अस्पताल के अनुसार सभी महिलाओं की सीजेरियन डिलीवरी हुई थी और बाद में स्वास्थ्य बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। इन घटनाओं के बाद अस्पताल की कार्यप्रणाली और प्रसूति सेवाओं पर सवाल उठने लगे हैं। मामले ने पूरे प्रदेश में चिंता बढ़ा दी है और स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

OT संक्रमण और संसाधनों को लेकर उठे गंभीर सवाल

मामले के बीच ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने की जानकारी भी सामने आई है, जिससे विवाद और गहरा गया। साथ ही सीमित सर्जिकल उपकरणों के बीच लगातार सीजेरियन ऑपरेशन किए जाने के आरोप भी चर्चा में हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मौतें गंभीर प्रसूति जटिलताओं के कारण हुईं और चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप सही नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार पूरे मामले की चिकित्सकीय दृष्टि से समीक्षा की जा रही है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अशोक गहलोत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घटनाओं पर शोक व्यक्त करते हुए राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भीलवाड़ा और बांसवाड़ा की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और इनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। गहलोत ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय से विशेषज्ञों की टीम भेजकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। उनका कहना है कि यदि अस्पतालों में संक्रमण, संसाधनों की कमी या अन्य व्यवस्थागत खामियां हैं तो उन्हें तत्काल दूर किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

हनुमान बेनीवाल ने जवाबदेही तय करने की मांग की

नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने भी लगातार हो रही मातृ मृत्यु की घटनाओं को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यदि अस्पतालों में संक्रमण की आशंका और संसाधनों की कमी के बावजूद ऑपरेशन जारी रहे, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। बेनीवाल ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

पहले कोटा और बीकानेर, अब भीलवाड़ा-बांसवाड़ा ने बढ़ाई चिंता

इससे पहले भी कोटा में प्रसूताओं की मौत और बीकानेर में सीजेरियन ऑपरेशन के बाद महिलाओं के गंभीर रूप से बीमार होने के मामले सामने आ चुके हैं। अब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा की घटनाओं ने सरकारी अस्पतालों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था पर नए सिरे से सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इन मामलों की वैज्ञानिक और निष्पक्ष जांच, संसाधनों की समीक्षा तथा जवाबदेही तय करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

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