UN में भारत का पाकिस्तान पर करारा प्रहार, कहा- सीमापार आतंकवाद के सबसे बड़े पीड़ित हम, अब दोहरे मापदंड खत्म करे दुनिया
संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति दोहराते हुए पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। भारत ने स्पष्ट कहा कि वह दशकों से सीमा-पार आतंकवाद का सबसे बड़ा पीड़ित रहा है और अब समय आ गया है कि दुनिया आतंकवाद पर दोहरे मापदंड छोड़कर एकजुट होकर निर्णायक कार्रवाई करे। भारत ने आतंकवाद की फंडिंग, नई तकनीकों के दुरुपयोग और आतंकियों के समर्थकों पर सख्त वैश्विक कार्रवाई की भी मांग उठाई।
संयुक्त राष्ट्र में भारत ने आतंकवाद पर सुनाया दो टूक संदेश
संयुक्त राष्ट्र में आयोजित ग्लोबल काउंटर-टेररिज्म स्ट्रैटेजी की नौवीं समीक्षा बैठक में भारत ने आतंकवाद के मुद्दे पर अपना स्पष्ट और सख्त पक्ष रखा। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि भारत वर्षों से सीमा-पार आतंकवाद का सामना कर रहा है और इस दौरान देश ने हजारों नागरिकों की जान, सामाजिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा की भारी कीमत चुकाई है। उन्होंने कहा कि इसी अनुभव ने भारत की आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को मजबूत किया है। भारत का मानना है कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति, राजनीतिक कारण या वैचारिक तर्क के आधार पर उचित नहीं ठहराया जा सकता और इसके हर स्वरूप की समान रूप से निंदा होनी चाहिए।
CCIT को लागू करने के लिए दुनिया से दिखाई राजनीतिक इच्छाशक्ति
भारत ने एक बार फिर कॉम्प्रिहेंसिव कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल टेररिज्म (CCIT) को जल्द लागू करने की मांग दोहराई। पी. हरीश ने कहा कि भारत वर्ष 2006 से इस वैश्विक समझौते की वकालत करता आ रहा है क्योंकि इससे आतंकवादी संगठनों और उनके समर्थकों को सुरक्षित ठिकाने, आर्थिक सहायता और हथियारों की उपलब्धता रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि वर्षों की चर्चा के बाद अब केवल विचार-विमर्श नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाकर इस प्रस्ताव को लागू करने की जरूरत है। इससे वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई को मजबूती मिलेगी।
भारत ने रखीं आतंकवाद से निपटने की छह बड़ी प्राथमिकताएं
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सामने आतंकवाद के खिलाफ छह प्रमुख प्राथमिकताओं को भी रखा। इनमें आतंकवाद पर दोहरे मापदंड समाप्त करना, आतंकवादियों और उनके फाइनेंसरों को सजा दिलाना, FATF मानकों को प्रभावी ढंग से लागू करना, नई तकनीकों के दुरुपयोग पर नियंत्रण, आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय और पुनर्वास तथा सदस्य देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग को बढ़ाना शामिल है। भारत ने कहा कि वैश्विक समुदाय को केवल आतंकवादी घटनाओं की निंदा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि आतंकवाद की पूरी संरचना को खत्म करने के लिए समन्वित प्रयास करने होंगे।
नई तकनीकों के दुरुपयोग पर जताई गंभीर चिंता
भारत ने अपने संबोधन में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते दुरुपयोग को भी वैश्विक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया। भारत के अनुसार आतंकवादी संगठन अब एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक, सोशल मीडिया, डार्क वेब, वर्चुअल एसेट्स और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अपने नेटवर्क मजबूत करने और कट्टरपंथ फैलाने के लिए कर रहे हैं। ऐसे में वैश्विक स्तर पर तकनीकी सहयोग, मजबूत नियामक व्यवस्था और सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करना बेहद जरूरी हो गया है ताकि आतंकवादियों की तकनीकी पहुंच को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।
आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय दिलाने पर दिया विशेष जोर
भारत ने कहा कि आतंकवाद पर होने वाली अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में अक्सर पीड़ितों की पीड़ा और पुनर्वास का मुद्दा पीछे रह जाता है। पी. हरीश ने कहा कि आतंकवाद के शिकार लोगों को केवल संवेदना नहीं बल्कि न्याय, सम्मान और प्रभावी पुनर्वास मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाओं को ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जिनमें पीड़ितों की आवाज़ केंद्र में हो। भारत का मानना है कि आतंकवाद से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाना और उनके जीवन को सामान्य बनाने की जिम्मेदारी पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की है।
FATF और वैश्विक सहयोग पर भारत का विशेष जोर
भारत ने आतंकवाद की फंडिंग को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने की अपील की। पी. हरीश ने कहा कि भारत लंबे समय से टेरर फाइनेंसिंग के खिलाफ वैश्विक अभियान का समर्थन करता रहा है और आगे भी संयुक्त राष्ट्र तथा सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करता रहेगा। उन्होंने कहा कि FATF मानकों को प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी है ताकि दुनिया का कोई भी क्षेत्र आतंकवादी संगठनों के लिए वित्तीय सुरक्षित ठिकाना न बन सके। भारत ने यह भी कहा कि आतंकवाद विरोधी रणनीति की केवल समीक्षा नहीं बल्कि उसका प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी के संदेश के साथ भारत ने खत्म किया संबोधन
अपने भाषण के अंत में पी. हरीश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संदेश को दोहराया जिसमें कहा गया है कि “दुनिया के किसी भी हिस्से में आतंकवाद, पूरी दुनिया की शांति के लिए खतरा है।” उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मामले में किसी भी तरह की अस्पष्टता या दोहरा रवैया स्वीकार नहीं किया जा सकता। दुनिया को आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय, आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य और वैश्विक शांति सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होकर निर्णायक नेतृत्व दिखाना होगा। भारत ने स्पष्ट किया कि आतंकवादी सिर्फ आतंकवादी होता है, उसे किसी भी बहाने या विचारधारा के नाम पर सही नहीं ठहराया जा सकता।