उदयपुर मेयर चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज, निर्दलीय पार्षदों पर BJP-कांग्रेस की नजर
उदयपुर नगर निगम में महापौर चुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों निर्दलीय और अन्य पार्षदों से संपर्क साध रही हैं। वार्ड-11 से निर्दलीय जीतने वाले कमलेश बोराणा शनिवार को भाजपा में शामिल हो गए। वहीं वार्ड-61 की निर्दलीय इंदिरा डांगी, वार्ड-60 की निर्दलीय खुशबू मेहता और वार्ड-32 के माकपा पार्षद राजेंद्र वसीटा को लेकर भी दोनों दलों से संपर्क की चर्चा है। मतदान से पहले पार्षदों को एक साथ रखने और उन्हें मतदान स्थल तक साथ ले जाने की तैयारी की जा रही है।
कमलेश बोराणा फिर भाजपा में शामिल
वार्ड-11 से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले कमलेश बोराणा शनिवार को भाजपा में शामिल हो गए। बोराणा ने नगर निगम चुनाव में भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ा था।चुनाव परिणाम के बाद उनका भाजपा में लौटना महापौर चुनाव से पहले महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, बोर्ड गठन में उनके समर्थन का अंतिम असर मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगा।
इंदिरा डांगी पर दोनों दलों की नजर
वार्ड-61 से निर्दलीय चुनाव जीतने वाली इंदिरा डांगी भी महापौर चुनाव के समीकरण में चर्चा में हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने किसी राजनीतिक दल से टिकट नहीं मांगा था।नामांकन के बाद उन्होंने परिवार के साथ घर-घर संपर्क कर प्रचार किया। उनके पति गेहरीलाल डांगी पहले वार्ड पंच और सरपंच प्रतिनिधि रह चुके हैं। अब दोनों प्रमुख दलों के पदाधिकारियों की ओर से उनसे संपर्क किए जाने की चर्चा है।
बिना बड़े प्रचार के जीतीं इंदिरा
इंदिरा डांगी के प्रचार का तरीका अन्य प्रत्याशियों से अलग रहा। उन्होंने बड़े चुनाव कार्यालय के बजाय घर-घर संपर्क पर जोर दिया।स्थानीय स्तर पर उनके चुनाव प्रचार में परिवार की भूमिका भी रही। अब महापौर चुनाव में उनकी स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि एक-एक पार्षद का समर्थन बहुमत के गणित को प्रभावित कर सकता है।
खुशबू मेहता भी समीकरण में महत्वपूर्ण
मादड़ी वार्ड-60 से निर्दलीय चुनाव जीतने वाली खुशबू मेहता भी राजनीतिक संपर्कों के बीच चर्चा में हैं। वह पूर्व निर्दलीय पार्षद कमलेश मेहता की पत्नी हैं।उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनसे भी एक राजनीतिक दल के पदाधिकारियों ने संपर्क किया है। खुशबू मेहता अपने पति और संबंधित लोगों से चर्चा के बाद आगे का फैसला करेंगी।
माकपा पार्षद राजेंद्र वसीटा पर भी नजर
वार्ड-32 से माकपा के राजेंद्र वसीटा ने भाजपा प्रत्याशी कमलेश सालवी को हराकर जीत दर्ज की है। वसीटा तीसरी बार पार्षद चुने गए हैं।उनका राजनीतिक अनुभव भी महापौर चुनाव के समीकरण में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों प्रमुख दलों की ओर से उनसे संपर्क किए जाने की चर्चा है। हालांकि, उनका अंतिम रुख स्पष्ट नहीं है।
रिसोर्ट में वोटों के गणित पर मंथन
बाड़ाबंदी में रखे गए पार्षदों ने शनिवार का दिन रिसोर्ट में बिताया। यहां महापौर चुनाव के लिए उपलब्ध समर्थन और संभावित समीकरणों पर चर्चा हुई।किस खेमे के पास कितने वोट हैं और निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से संख्या किस तरह बदल सकती है, इसे लेकर रणनीति पर मंथन किया गया। पार्टी पदाधिकारियों ने भी पार्षदों से मुलाकात की।
मतदान से पहले तीर्थ स्थल ले जाने की तैयारी
महापौर चुनाव से पहले पार्षदों को एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पर एक साथ ले जाने की योजना की जानकारी सामने आई है। इसके बाद उन्हें सीधे मतदान स्थल पर लाने की तैयारी बताई जा रही है।इस तरह की व्यवस्था का उद्देश्य पार्षदों को मतदान तक एक साथ रखना बताया जा रहा है। हालांकि, अंतिम कार्यक्रम में बदलाव संभव है।
सोमवार को होगा महापौर चुनाव
उदयपुर नगर निगम में महापौर चुनाव से पहले अब दोनों प्रमुख दल अपने-अपने समर्थन का गणित मजबूत करने में जुटे हैं। निर्दलीय और अन्य दलों के पार्षदों की भूमिका पर विशेष नजर है।कमलेश बोराणा के भाजपा में शामिल होने के बाद समीकरण में बदलाव जरूर आया है, लेकिन महापौर पद के लिए अंतिम स्थिति मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगी। सोमवार को होने वाले चुनाव में पार्षदों के वोट से नगर निगम के अगले महापौर का फैसला होगा।