माउंट आबू में 44 साल बाद अनोखा संयोग, जिस पद पर दादा थे DSP वहीं पोते ने संभाली कमान
माउंट आबू में पुलिस सेवा से जुड़ा एक अनोखा पारिवारिक संयोग सामने आया है। जोधपुर के गिलाकोर निवासी जितेंद्र सिंह राठौड़ ने करीब एक माह पहले माउंट आबू के पुलिस उपाधीक्षक (DSP) का पदभार संभाला। खास बात यह है कि करीब 44 साल पहले उनके दिवंगत दादा रघुनाथ सिंह राठौड़ भी इसी पद पर माउंट आबू में तैनात थे। वर्ष 1981-82 में दादा ने जिस पद की जिम्मेदारी संभाली थी, अब उसी पद पर पोते की नियुक्ति हुई है।
44 साल बाद फिर जुड़ी दो पीढ़ियों की कड़ी
जितेंद्र सिंह राठौड़ की माउंट आबू में पोस्टिंग के साथ उनके परिवार की पुरानी यादें फिर ताजा हो गई हैं। उनके दादा रघुनाथ सिंह राठौड़ वर्ष 1981-82 में माउंट आबू में पुलिस उपाधीक्षक के पद पर कार्यरत रहे थे।करीब साढ़े चार दशक बाद परिवार की दूसरी पीढ़ी उसी पद पर पहुंची है। एक ही स्थान और एक ही पद पर दादा और पोते की पुलिस सेवा का यह संयोग स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
जोधपुर के गिलाकोर गांव से जुड़ा परिवार
जितेंद्र सिंह राठौड़ मूल रूप से जोधपुर जिले के गिलाकोर गांव के रहने वाले हैं। उनके परिवार का पुलिस सेवा से जुड़ा यह पुराना संबंध अब माउंट आबू से फिर जुड़ गया है।दादा के कार्यकाल के कई दशक बाद पोते को उसी स्थान पर सेवा करने का अवसर मिलना परिवार के लिए खास अनुभव है। इस नियुक्ति ने पुराने कार्यकाल की यादों को भी फिर से जीवंत कर दिया है।
पर्यटन नगरी में DSP की जिम्मेदारी अहम
माउंट आबू राजस्थान का प्रमुख पर्वतीय पर्यटन स्थल है। यहां सालभर देश के अलग-अलग हिस्सों से पर्यटक पहुंचते हैं। पर्यटन सीजन में यह संख्या और बढ़ जाती है।ऐसे में DSP के सामने कानून-व्यवस्था के साथ यातायात प्रबंधन और पर्यटकों की सुरक्षा जैसी जिम्मेदारियां रहती हैं। स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच बेहतर पुलिस समन्वय बनाए रखना भी पुलिस प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
बदल गया माउंट आबू, बढ़ी पुलिस की चुनौतियां
1981-82 के दौर की तुलना में आज माउंट आबू का स्वरूप काफी बदल चुका है। पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के साथ पुलिस के सामने आने वाली चुनौतियां भी अलग हुई हैं।बढ़ते पर्यटक दबाव के बीच ट्रैफिक मैनेजमेंट, भीड़ नियंत्रण और कानून-व्यवस्था पर लगातार नजर रखना जरूरी होता है। इसके अलावा स्थानीय नागरिकों की शिकायतों और सुरक्षा से जुड़े मामलों पर भी पुलिस को सक्रिय रहना पड़ता है।
दादा की यादों वाली जगह अब पोते का कार्यक्षेत्र
राठौड़ परिवार के लिए माउंट आबू की यह पोस्टिंग सिर्फ एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं है। यह परिवार की दो पीढ़ियों को जोड़ने वाला यादगार संयोग भी है।जिस जगह पर रघुनाथ सिंह राठौड़ ने चार दशक से ज्यादा पहले DSP के रूप में सेवाएं दी थीं, अब उसी जगह जितेंद्र सिंह राठौड़ पुलिस उपाधीक्षक के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इस संयोग ने परिवार की पुरानी यादों को एक बार फिर सामने ला दिया है।
एक ही पद पर दो पीढ़ियों की सेवा
पुलिस सेवा में अलग-अलग पीढ़ियों का आगे आना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन एक ही स्थान और एक ही पद पर दशकों के अंतराल के बाद दादा और पोते की तैनाती खास संयोग है।माउंट आबू में जितेंद्र सिंह राठौड़ की नियुक्ति ने इसी वजह से ध्यान खींचा है। अब उनके कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था, पर्यटक सुरक्षा और यातायात व्यवस्था से जुड़े काम पर नजर रहेगी।