उदयपुर: ट्रेनिंग सेंटर संचालक पर छात्राओं से छेड़छाड़ और ब्लैकमेलिंग के आरोप, IG-SP से शिकायत
राजस्थान के उदयपुर जिले के कानोड़ में सरकारी अनुदानित कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र के संचालक पर छात्राओं के साथ छेड़छाड़, अनुचित व्यवहार की कोशिश और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता छात्राओं ने संचालक देवीलाल जाट सहित कुछ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। छात्राओं का आरोप है कि अच्छे अंक दिलाने का झांसा देकर उन्हें कार्यालय बुलाया जाता था। उन्होंने शिकायत के समर्थन में ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंपने का दावा भी किया है। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
अच्छे अंक दिलाने का झांसा देकर कार्यालय बुलाने का आरोप
उदयपुर जिले के कानोड़ शहर में संचालित एक कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र को लेकर विवाद सामने आया है। शिकायत के अनुसार, केंद्र के संचालक देवीलाल जाट पर प्रशिक्षण लेने वाली छात्राओं को परीक्षा में अच्छे अंक दिलाने का झांसा देकर कार्यालय बुलाने का आरोप है।छात्राओं का कहना है कि कार्यालय में उनके साथ आपत्तिजनक व्यवहार करने की कोशिश की जाती थी। उन्होंने अनुचित दबाव बनाने और मानसिक रूप से परेशान करने के आरोप भी लगाए हैं।शिकायत में केंद्र की एक ट्रेनर और कुछ अन्य महिला कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। छात्राओं का आरोप है कि ये कर्मचारी उन पर दबाव बनाकर उन्हें संचालक के पास भेजती थीं।हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना भी जरूरी है।
IG और SP को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग
पीड़ित छात्राओं ने मामले में पुलिस महानिरीक्षक (IG) और पुलिस अधीक्षक (SP) को शिकायत भेजने की बात कही है। उन्होंने संचालक और कथित रूप से शामिल अन्य कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की मांग की है।शिकायत में छात्राओं ने कथित छेड़छाड़, मानसिक प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग जैसे आरोपों का उल्लेख किया है। उनका कहना है कि प्रशिक्षण केंद्र में पढ़ाई के लिए आने वाली छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।छात्राओं ने अधिकारियों से मामले को गंभीरता से लेने और निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। अब शिकायत पर पुलिस और संबंधित विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर नजर रहेगी।
ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंपने का दावा
शिकायतकर्ता छात्राओं ने मामले से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंपने का दावा किया है। उनके अनुसार, एक रिकॉर्डिंग में संचालक कथित तौर पर अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगता सुनाई देता है।वहीं, दूसरी रिकॉर्डिंग में ट्रेनर और एक छात्रा के बीच बातचीत होने का दावा किया गया है। छात्राओं का कहना है कि ये रिकॉर्डिंग मामले की जांच में अहम हो सकती हैं।हालांकि, रिकॉर्डिंग की वास्तविकता, उसकी पूरी बातचीत और संदर्भ की पुष्टि स्वतंत्र जांच के बाद ही हो सकेगी। केवल रिकॉर्डिंग के दावे के आधार पर आरोपों को प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
पहले भी शिकायत करने का दावा
छात्राओं का आरोप है कि उन्होंने इससे पहले भी संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखी थी। उनके मुताबिक, शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।उन्होंने दावा किया कि संचालक के खिलाफ निलंबन या अन्य कार्रवाई नहीं होने के कारण केंद्र में नया बैच भी शुरू कर दिया गया। छात्राओं ने आशंका जताई कि कार्रवाई में देरी होने से दूसरी छात्राओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।हालांकि, पहले की शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इस पहलू की जांच भी मामले में महत्वपूर्ण हो सकती है।
प्रशिक्षण केंद्र में छात्राओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस मामले ने सरकारी अनुदानित कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों में छात्राओं की सुरक्षा और शिकायतों के निस्तारण को लेकर सवाल खड़े किए हैं।प्रशिक्षण संस्थानों में छात्राओं को सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है। यदि किसी संस्थान के संचालक या कर्मचारी पर अनुचित व्यवहार के आरोप लगते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच और शिकायतकर्ता की सुरक्षा महत्वपूर्ण होती है।फिलहाल कानोड़ के इस मामले में छात्राओं ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की है। आरोपों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई और संबंधित पक्षों का बयान सामने आने के बाद मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।