किशोर कुमार डेथ एनिवर्सरी: मुकेश का गाना सुनकर रो पड़े थे किशोर दा, खंडवा लौटने की कही थी बात
हिंदी सिनेमा के महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार की 13 अक्टूबर को पुण्यतिथि है। अपनी अनोखी आवाज, शानदार अभिनय और बहुमुखी प्रतिभा से उन्होंने करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई। उनके बेटे और गायक अमित कुमार ने उनसे जुड़े कई भावुक किस्से साझा किए थे। इनमें मुकेश का गाना ‘आ अब लौट चलें’ सुनकर किशोर कुमार का रो पड़ना और खंडवा लौटने की इच्छा जताना शामिल है। एक बांग्ला गीत से भावुक होकर उन्होंने उसकी फीस लेने से भी इनकार कर दिया था।
13 अक्टूबर 1987 को हुआ था किशोर कुमार का निधन
किशोर कुमार हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में शामिल थे, जिन्होंने गायकी के साथ अभिनय, निर्देशन और लेखन में भी अपनी पहचान बनाई। उनकी आवाज में भावनाओं की गहराई थी। यही वजह है कि उनके गाने आज भी संगीत प्रेमियों के बीच लोकप्रिय हैं।किशोर कुमार का जन्म मध्य प्रदेश के खंडवा में हुआ था। 13 अक्टूबर 1987 को मुंबई में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। उन्होंने 58 वर्ष की उम्र में दुनिया को अलविदा कहा।उनके निधन के दशकों बाद भी उनके गीत नई पीढ़ी के श्रोताओं तक पहुंच रहे हैं। उनकी गायकी की खासियत यह थी कि वे रोमांटिक, उदास और हास्यपूर्ण गीतों को भी अपने अलग अंदाज में प्रस्तुत करते थे।
मुकेश का ‘आ अब लौट चलें’ सुनकर भावुक हो गए थे किशोर दा
किशोर कुमार के बेटे और गायक अमित कुमार ने एक इंटरव्यू में अपने पिता से जुड़ा भावुक किस्सा साझा किया था। उन्होंने बताया कि किशोर कुमार को रेडियो सुनना बेहद पसंद था।जब रेडियो पर उनके गाने दूसरे गायकों के मुकाबले ज्यादा बजते थे, तो वे बच्चों की तरह खुश हो जाते थे। लेकिन एक दिन मुकेश की आवाज में फिल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ का गीत ‘आ अब लौट चलें’ सुनकर वे भावुक हो गए।अमित कुमार के मुताबिक, गाना सुनते-सुनते किशोर कुमार रोने लगे। उन्होंने खंडवा वापस लौटने की इच्छा भी जताई। अमित ने बताया कि उनके पिता भले ही फिल्मी दुनिया के बड़े सितारे थे, लेकिन दिल से गांव की सादगी से जुड़े हुए थे।यह किस्सा किशोर कुमार के व्यक्तित्व का एक अलग पहलू सामने लाता है। उनकी लोकप्रियता और सफलता के पीछे एक ऐसा इंसान भी था, जो अपनी जड़ों को याद करता था।
बांग्ला गीत के लिए फीस लेने से कर दिया था इनकार
किशोर कुमार अपने स्पष्ट स्वभाव के लिए भी जाने जाते थे। अमित कुमार ने बताया कि उनके पिता अक्सर अपने आत्मसम्मान को लेकर दृढ़ रहते थे। वे मजाकिया अंदाज में कहते थे कि उनका अंगूठा अकड़ा हुआ है और वे आसानी से झुकते नहीं हैं।हालांकि, कुछ मौकों पर उनकी संवेदनशीलता भी सामने आई। अमित कुमार के अनुसार, एक बार किशोर कुमार प्रसिद्ध बांग्ला गीतकार गौरी प्रसन्न मजूमदार का लिखा गीत ‘ई तो जोबोन’ रिकॉर्ड कर रहे थे।गीत के भाव हिंसा, ईर्ष्या और दुश्मनी जैसी नकारात्मक भावनाओं के अंत तथा जीवन की नश्वरता से जुड़े थे। इन विचारों ने किशोर कुमार को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने इस गीत के लिए पैसे लेने से इनकार कर दिया।यह प्रसंग बताता है कि संगीत उनके लिए केवल पेशा नहीं था। गीत के बोल और उनके भाव भी उन्हें गहराई से प्रभावित करते थे।
स्टारडम से दूर रहती थी किशोर कुमार की जिंदगी
अमित कुमार ने अपने पिता की सादगी से जुड़ी कई बातें भी साझा की थीं। उनके बड़े भाई अशोक कुमार उस दौर के बड़े सितारों में शामिल थे। उनके घर पर फिल्मी हस्तियों की पार्टियां हुआ करती थीं।अमित के मुताबिक, किशोर कुमार शराब नहीं पीते थे। ऐसी पार्टियों के दौरान वे कई बार हाजी अली की मुंडेर पर जाकर बैठ जाते थे और वहीं समय बिताते थे।किशोर कुमार का जीवन अनुशासित भी था। वे सुबह जल्दी उठते और रात को जल्दी सो जाते थे। उन्हें पारंपरिक बंगाली भोजन पसंद था। उनकी पसंदीदा चीजों में पूरी-तरकारी, आलू-गोभी, मटन करी, कतला मछली और हिलसा करी शामिल थीं।उनका व्यक्तित्व फिल्मी दुनिया के दिखावे से अलग था। वे अपनी शर्तों पर जीवन जीने के लिए पहचाने जाते थे।
हॉलीवुड फिल्मों के भी शौकीन थे किशोर कुमार
किशोर कुमार को केवल संगीत से ही लगाव नहीं था। उन्हें हॉलीवुड की फिल्में देखना भी बेहद पसंद था। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमित कुमार ने बताया था कि उनके पिता एक बार अमेरिका से करीब 8,000 डॉलर के फिल्मों के कैसेट खरीदकर लाए थे।अमित कुमार ने यह भी बताया कि जब वे कलकत्ता से मुंबई आते थे, तो वीकेंड पर पिता के साथ फिल्में देखने जाते थे। कई बार दोनों एक ही दिन में तीन-तीन फिल्में देख लेते थे।फिल्मों के प्रति उनका यह शौक उनकी रचनात्मक दुनिया का हिस्सा था। वे अलग-अलग तरह के सिनेमा से प्रेरणा लेते थे और मनोरंजन की दुनिया के कई पहलुओं में रुचि रखते थे।
आज भी याद किए जाते हैं किशोर कुमार
किशोर कुमार की विरासत उनके गीतों, फिल्मों और उनसे जुड़े किस्सों में जीवित है। उनकी आवाज ने हिंदी फिल्म संगीत को कई यादगार गीत दिए। वहीं, उनका अभिनय और हास्यपूर्ण अंदाज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय रहा।मुकेश का गीत सुनकर भावुक होने से लेकर एक बांग्ला गीत के लिए फीस छोड़ने तक के किस्से उनके व्यक्तित्व की संवेदनशीलता दिखाते हैं। किशोर कुमार केवल एक लोकप्रिय गायक नहीं थे, बल्कि संगीत को महसूस करने वाले कलाकार भी थे।उनकी पुण्यतिथि पर प्रशंसक एक बार फिर उनके गीतों और यादगार भूमिकाओं को याद कर रहे हैं। यही उनकी कला की ताकत है कि दशकों बाद भी उनकी आवाज लोगों के दिलों तक पहुंचती है।