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Udaipur BJP: वार्ड-3 के प्रत्याशी ने खोला मोर्चा, अतुल चंडालिया बोले- आरोप साबित हुए तो दे दूंगा इस्तीफा

उदयपुर। उदयपुर भाजपा में नगर निगम चुनाव के बाद अंदरूनी खींचतान का मामला एक बार फिर सामने आया है। वार्ड-3 से भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी रहे गिरीश श्रीमाली ने पार्टी के नवनिर्वाचित पार्षद अतुल चंडालिया और कुछ अन्य पदाधिकारियों पर चुनाव में भीतरघात करने के आरोप लगाए हैं। श्रीमाली ने चुनाव प्रभारी राजेंद्र राठौड़ को शिकायत भेजकर पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।दूसरी ओर, अतुल चंडालिया ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो जाते हैं, तो वह इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने शिकायतकर्ता को भी चुनौती दी कि आरोप साबित नहीं होने पर उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिए। इस बयान के बाद उदयपुर भाजपा में चुनाव के बाद चल रही खींचतान फिर चर्चा में आ गई है।

गिरीश श्रीमाली ने चुनाव प्रभारी को भेजी शिकायत

गिरीश श्रीमाली के शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि पूर्व मंडल अध्यक्ष और नवनिर्वाचित पार्षद अतुल चंडालिया ने निर्दलीय प्रत्याशी के पक्ष में काम किया। शिकायत के अनुसार, पार्टी के कुछ स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन किया।श्रीमाली ने चुनाव प्रभारी राजेंद्र राठौड़ से मामले की जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में पार्टी की जांच और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।

निर्दलीय प्रत्याशी को आर्थिक मदद देने का आरोप

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि निर्दलीय प्रत्याशी को चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक सहायता दी गई। श्रीमाली का दावा है कि निर्दलीय उम्मीदवार के प्रचार को मजबूत करने के लिए आर्थिक मदद के साथ अन्य व्यवस्थाएं भी की गईं।शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि निर्दलीय प्रत्याशी के चुनावी शिविर में भोजन के पैकेट पहुंचाए गए। इसके अलावा, कुछ स्थानीय संगठनों और उत्सव समितियों को आर्थिक सहायता देकर निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन में माहौल बनाने का आरोप भी लगाया गया है।इन आरोपों पर संबंधित व्यक्तियों का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

शिकायत में कई पदाधिकारियों के नाम

गिरीश श्रीमाली की शिकायत में शक्ति केंद्र प्रभारी एवं बूथ अध्यक्ष खेमराज कुम्हार, वार्ड अध्यक्ष नवलराम कुमावत, बूथ अध्यक्ष जगदीश पंवार, पुष्कर कुमावत, रतन पारिख और मोहन सिंह राठौड़ के नाम शामिल बताए गए हैं।इसके अलावा, पार्षद प्रत्याशी रहे प्रदीप जैन और प्रदीप कुमावत का नाम भी शिकायत में होने की जानकारी दी गई है। जिला मंत्री तुषार मेहता पर टिकट नहीं मिलने के बाद पदाधिकारियों को भड़काने का आरोप लगाया गया है। वहीं, पूर्व महामंत्री सुधीर कुमावत पर चुनाव के दौरान उदासीनता बरतने का आरोप लगाया गया है।ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इनकी पुष्टि के लिए संगठनात्मक जांच और संबंधित लोगों का पक्ष सामने आना जरूरी है।

अतुल चंडालिया का जवाब- आरोप साबित हुए तो इस्तीफा दूंगा

अतुल चंडालिया ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई आरोप साबित होता है, तो वह इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि आरोप साबित नहीं होते, तो शिकायतकर्ता को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देना चाहिए।चंडालिया ने कहा कि वह कई वर्षों से पार्टी की सेवा कर रहे हैं और पार्टी नेतृत्व उनसे जवाब मांगेगा तो वह उचित जवाब देंगे। उन्होंने शिकायतकर्ता पर अपनी जिम्मेदारी दूसरों पर डालने का आरोप भी लगाया।चंडालिया के इस बयान के बाद अब पूरे मामले में भाजपा संगठन की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।

वार्ड-3 में गिरीश श्रीमाली को मिली थी हार

उदयपुर नगर निगम चुनाव में वार्ड-3 से भाजपा के गिरीश श्रीमाली को कांग्रेस प्रत्याशी अरुण टाक ने हराया था। प्रकाशित चुनाव परिणामों के अनुसार, अरुण टाक को 1,623 वोट मिले, जबकि श्रीमाली को 1,341 वोट मिले। जीत का अंतर 282 वोट रहा। वहीं, अतुल चंडालिया वार्ड-78 से भाजपा के टिकट पर पार्षद निर्वाचित हुए थे। चुनाव परिणामों के बाद वार्ड-3 में कथित भीतरघात को लेकर शिकायत सामने आने से पार्टी के भीतर संगठनात्मक गतिविधियों और कार्यकर्ताओं की भूमिका पर सवाल उठे हैं।

भाजपा संगठन की जांच पर टिकी नजर

गिरीश श्रीमाली ने शिकायत के जरिए मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है, जबकि अतुल चंडालिया ने आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव प्रभारी राजेंद्र राठौड़ और भाजपा संगठन शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं।फिलहाल किसी भी पक्ष के आरोपों को जांच से पहले अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। जांच में शिकायत से जुड़े तथ्यों, प्रचार गतिविधियों और संबंधित पदाधिकारियों की भूमिका की पड़ताल के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

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Stv News Rajasthan

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