आबकारी घोटाले में रामगोपाल अग्रवाल की बढ़ीं मुश्किलें, 25 जुलाई तक EOW रिमांड मंजूर
छत्तीसगढ़ के चर्चित आबकारी घोटाले की जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने गिरफ्तार कर विशेष अदालत में पेश किया, जहां अदालत ने उन्हें 25 जुलाई तक पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर भेजने की अनुमति दी। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और अन्य तथ्यों की पड़ताल जारी है।
कोल लेवी रिमांड खत्म होने के बाद हुई नई कार्रवाई
जांच एजेंसियों के अनुसार रामगोपाल अग्रवाल पहले से कोल लेवी मामले में पुलिस रिमांड पर थे। उस रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद उन्हें विशेष अदालत में पेश किया गया। इसके बाद EOW ने आबकारी घोटाले में पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड की मांग रखी। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीमित अवधि के लिए रिमांड मंजूर कर दिया। अब जांच एजेंसी निर्धारित अवधि तक उनसे आबकारी घोटाले से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर पूछताछ करेगी।
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वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क की होगी पड़ताल
EOW का कहना है कि आबकारी घोटाले में कथित आर्थिक लेन-देन, वित्तीय दस्तावेजों और विभिन्न व्यक्तियों के बीच संपर्कों की जांच अभी जारी है। एजेंसी के अनुसार पूछताछ के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों का मिलान किया जाएगा। जांच अधिकारी यह भी पता लगाने का प्रयास करेंगे कि मामले में किन-किन स्तरों पर कथित तौर पर वित्तीय गतिविधियां हुईं और उनसे जुड़े तथ्यों की पुष्टि कैसे की जा सकती है। एजेंसी का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
रामगोपाल अग्रवाल लंबे समय तक कांग्रेस संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। उनकी गिरफ्तारी और रिमांड के बाद प्रदेश की राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस खबर के लिखे जाने तक कांग्रेस की ओर से इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजर अब जांच की आगामी प्रक्रिया पर बनी हुई है।
जांच एजेंसियां आगे भी जारी रखेंगी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ में कोल लेवी और आबकारी घोटाले से जुड़े मामलों की जांच कई महीनों से जारी है। EOW और ACB विभिन्न आरोपों की जांच करते हुए संबंधित लोगों से पूछताछ कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार रामगोपाल अग्रवाल से पूछताछ भी इसी जांच का हिस्सा है। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।