महाराणा प्रताप जयंती पर गूंजा वीर रस, कवि सम्मेलन में प्रताप के स्वाभिमान और शौर्य को किया नमन
महाराणा प्रताप स्मृति एवं शोध संस्थान, शिवाजी पार्क द्वारा आयोजित पंच दिवसीय प्रताप जयंती समारोह के दूसरे दिन राष्ट्रीय कवि संगम और साहित्य परिषद के सहयोग से भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कवियों ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के अदम्य साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति को अपनी कविताओं के माध्यम से जीवंत किया। वीर रस, ओज, गीत, गजल और हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर तक बांधे रखा।
सरस्वती वंदना के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत पुरुषोत्तम शर्मा द्वारा सरस्वती वंदना से की गई। आयोजन संयोजक डॉ. अशोक पाठक ने बताया कि कवि सम्मेलन का उद्देश्य नई पीढ़ी को महाराणा प्रताप के आदर्शों और संघर्षों से परिचित कराना है। मंच संचालन कर रहे योगेश वशिष्ठ ने महाराणा प्रताप के साहस को याद करते हुए ओजस्वी कविता प्रस्तुत की। उनकी पंक्तियों ने श्रोताओं में उत्साह का संचार किया और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
वीर रस की कविताओं ने जगाया स्वाभिमान
कार्यक्रम में बालिका अरविंदम ने श्याम नारायण पांडेय की रचनाओं से प्रेरित ओजपूर्ण प्रस्तुति दी। कवि हेमंत शर्मा विप्र ने “जयचंद हमको स्वीकार नहीं” जैसी पंक्तियों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति और स्वाभिमान का संदेश दिया। वहीं लक्ष्मणगढ़ से आए कवि रामकुमार प्रजापति ने महाराणा प्रताप के अडिग संकल्प और मेवाड़ की आन-बान-शान को अपनी कविता में प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
गीत और गजल ने भी जीता दिल
गीतकार डॉ. अरुण शर्मा ने मातृभूमि के प्रति समर्पण और बलिदान की भावना से ओतप्रोत गीत प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं से भरपूर सराहना मिली। डीग से आए कवि मनीष मनु ने अपनी गजल “नदी को किनारा चाहिए था” के माध्यम से संवेदनाओं को शब्द दिए। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम में भावनात्मक रंग भर दिया और साहित्य प्रेमियों को विशेष रूप से प्रभावित किया।
हास्य-व्यंग्य से भी गूंजा मंच
बड़ौदामेव से आए कवि देवराज शर्मा ने हास्य-व्यंग्य की रचनाओं के माध्यम से समसामयिक विषयों पर कटाक्ष किया। उन्होंने भूत और वर्तमान के प्रसंगों को रोचक अंदाज में प्रस्तुत करते हुए श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। उनकी प्रस्तुति ने कार्यक्रम के माहौल को हल्का और मनोरंजक बना दिया। बीना गुप्ता ने भी अपनी काव्य प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में सहभागिता निभाई।
गणमान्य लोगों की रही उपस्थिति
कवि सम्मेलन में पूर्व पार्षद सुदेश खांबरा, साहित्य परिषद के संभाग उपाध्यक्ष कपिल शर्मा, समाजसेवी अशोक अवस्थी, रामलीला निर्देशक महेंद्र शर्मा, अशोक गुप्ता सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अशोक पाठक ने सभी कवियों, अतिथियों और श्रोताओं का आभार व्यक्त किया तथा प्रताप जयंती समारोह को सफल बनाने में सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।