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उज्ज्वला योजना में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की सीमा घटी, सरकार ने बताई वजह

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या को लेकर हाल में बड़ा बदलाव सामने आया है। सरकार ने सब्सिडी वाले सिलेंडरों की सीमा घटाने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद लाभार्थियों के बीच कई सवाल उठ रहे हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य वास्तविक पात्र परिवारों तक लाभ पहुंचाना, सब्सिडी के दुरुपयोग पर रोक लगाना और योजना को अधिक पारदर्शी बनाना है। अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव उपभोग के आंकड़ों और योजना की समीक्षा के बाद किया गया है।

सब्सिडी के दुरुपयोग पर लगाम लगाने की कोशिश

सरकारी स्तर पर की गई समीक्षा में कुछ ऐसे मामले सामने आए, जिनमें रियायती दर पर मिलने वाले एलपीजी सिलेंडरों का उपयोग घरेलू जरूरतों के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों में किए जाने की आशंका जताई गई। अधिकारियों का मानना है कि कुछ स्थानों पर सब्सिडी वाले सिलेंडरों की कालाबाजारी और गलत उपयोग की शिकायतें भी मिली थीं। ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने सब्सिडी की सीमा तय करने का निर्णय लिया। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि योजना का लाभ केवल जरूरतमंद परिवारों तक ही सीमित रहे।

उपभोग के आंकड़ों के आधार पर लिया गया फैसला

सरकार का कहना है कि उज्ज्वला योजना के अधिकांश लाभार्थी परिवार सालभर में सीमित संख्या में ही सिलेंडर रिफिल कराते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि बड़ी संख्या में परिवारों की वार्षिक खपत निर्धारित नई सीमा के आसपास ही रहती है। इसी आधार पर सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में बदलाव किया गया। अधिकारियों के अनुसार इससे उन परिवारों पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो एलपीजी का उपयोग केवल घरेलू आवश्यकताओं के लिए करते हैं।

सिलेंडर खरीदने पर नहीं लगी कोई रोक

नई व्यवस्था में लाभार्थियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिलेंडर खरीदने की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। परिवार अपनी जरूरत के अनुसार वर्षभर में जितने चाहें उतने सिलेंडर खरीद सकते हैं। बदलाव केवल सब्सिडी तक सीमित है। निर्धारित संख्या तक रिफिल पर रियायत मिलेगी, जबकि उसके बाद लिए जाने वाले सिलेंडरों के लिए उपभोक्ताओं को बाजार मूल्य का भुगतान करना होगा। इससे घरेलू जरूरतों की पूर्ति पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं लगेगा।

सरकारी खर्च और पारदर्शिता पर रहेगा फोकस

सरकार का मानना है कि कल्याणकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखना और सरकारी संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है। सब्सिडी के दायरे को व्यवस्थित करने से सरकारी खजाने पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम किया जा सकेगा। साथ ही योजना के लाभार्थियों का बेहतर सत्यापन और निगरानी भी संभव होगी। अधिकारियों के अनुसार यह कदम योजना को अधिक प्रभावी और लक्षित बनाने की दिशा में उठाया गया है।

लाभार्थियों पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन परिवारों की एलपीजी खपत सीमित है, उन्हें इस बदलाव का ज्यादा असर महसूस नहीं होगा। हालांकि जिन परिवारों की खपत अधिक है, उन्हें अतिरिक्त सिलेंडरों के लिए पूर्ण कीमत चुकानी पड़ सकती है। आने वाले समय में सरकार योजना की प्रभावशीलता और लाभार्थियों की जरूरतों के आधार पर आगे भी समीक्षा कर सकती है। फिलहाल सरकार का जोर सब्सिडी को सही हाथों तक पहुंचाने और दुरुपयोग रोकने पर है।

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