री-नीट के नाम पर टेलीग्राम ठगी का खुलासा, फर्जी पेपर बेचने वाला 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार
री-नीट परीक्षा को लेकर छात्रों की चिंता का फायदा उठाकर फर्जी पेपर बेचने की कोशिश करने वाले एक युवक को भीलवाड़ा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपी टेलीग्राम चैनल के जरिए कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का दावा कर रहा था और छात्रों से पैसे वसूलने की तैयारी में था। पुलिस जांच में सामने आया है कि वह तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था। अब उसके बैंक खातों, मोबाइल डेटा और ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की जा रही है।
टेलीग्राम चैनल बनाकर छात्रों को बनाया निशाना
पुलिस के अनुसार आरोपी ने “पेपर माफिया” नाम से टेलीग्राम चैनल बनाया हुआ था, जिसके माध्यम से री-नीट परीक्षा का कथित पेपर उपलब्ध कराने का प्रचार किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि चैनल से कई लोग जुड़े हुए थे और परीक्षा से पहले छात्रों को फर्जी प्रश्नपत्र बेचने की योजना बनाई गई थी। पुलिस का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों में बने दबाव और असमंजस का फायदा उठाकर आर्थिक लाभ कमाने की कोशिश की जा रही थी।
विशेष शाखा की सूचना के बाद हुई कार्रवाई
मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक कार्यालय की विशेष शाखा को मिली थी। सूचना के आधार पर प्रतापनगर थाना पुलिस को अलर्ट किया गया और निगरानी शुरू की गई। जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि होने पर पुलिस ने देर रात कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई होने से कई छात्र संभावित ठगी का शिकार होने से बच गए। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास कर रही है कि उसके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।
19 वर्षीय छात्र निकला आरोपी
गिरफ्तार युवक की पहचान 19 वर्षीय आकाश चौधरी के रूप में हुई है, जो मूल रूप से चूरू जिले का निवासी बताया जा रहा है। वह विज्ञान वर्ग का छात्र है और तकनीकी जानकारी का उपयोग कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सक्रिय था। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक मोबाइल से प्राप्त जानकारी से यह पता लगाया जाएगा कि उसने कितने लोगों से संपर्क किया और किस स्तर तक फर्जी पेपर बेचने की गतिविधि संचालित की।
बैंक खातों और लेन-देन की होगी जांच
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने भुगतान प्राप्त करने के लिए अपने बैंक खाते से जुड़ा क्यूआर कोड साझा कर रखा था। अब उसके बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच की जाएगी। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या किसी छात्र ने उसके खाते में रकम ट्रांसफर की थी या नहीं। यदि आर्थिक लेन-देन के प्रमाण मिलते हैं तो मामले में धोखाधड़ी और साइबर अपराध से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
वीपीएन के जरिए चला रहा था प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म
जांच में सामने आया है कि आरोपी वीपीएन और अन्य तकनीकी साधनों का उपयोग कर टेलीग्राम प्लेटफॉर्म तक पहुंच बना रहा था। पुलिस का कहना है कि उसने अपनी पहचान छिपाने और गतिविधियों को गुप्त रखने के लिए विभिन्न डिजिटल तरीकों का इस्तेमाल किया। अब साइबर विशेषज्ञ उसके ऑनलाइन नेटवर्क, चैट हिस्ट्री और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों को आशंका है कि इस तरह के फर्जी नेटवर्क परीक्षा के समय सक्रिय होकर छात्रों को भ्रमित करने का प्रयास करते हैं।