छात्र प्रदर्शन मामले में SC की सुनवाई, प्रशांत भूषण ने उठाए सवाल; SG बोले- ‘सबको बेईमान कहेंगे?’
छात्र प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाई पावर्ड कमेटी की कार्यप्रणाली को लेकर बहस हुई। सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि कमेटी ने अपना काम शुरू कर दिया है और अगली बैठक 15 सितंबर को प्रस्तावित है। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से कमेटी की निगरानी और शिकायतें पहुंचाने के लिए एमिकस क्यूरी या नोडल अधिकारी नियुक्त करने की मांग की गई। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कमेटी के एक सदस्य की निष्पक्षता पर सवाल उठाया। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने आपत्ति जताई।
हाई पावर्ड कमेटी ने शुरू किया काम
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि छात्र प्रदर्शन मामले की जांच के लिए गठित हाई पावर्ड कमेटी ने अपना काम शुरू कर दिया है।
उन्होंने बताया कि कमेटी की अगली बैठक 15 सितंबर को प्रस्तावित है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत से कमेटी की कार्यवाही और प्रगति की जानकारी कोर्ट तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाने का आग्रह किया गया।
एमिकस क्यूरी या नोडल अधिकारी की मांग
याचिकाकर्ता पक्ष के वकीलों ने सुझाव दिया कि कमेटी के कामकाज पर नजर रखने के लिए किसी एमिकस क्यूरी या नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जाए।
वकीलों का कहना था कि इससे सुप्रीम कोर्ट को कमेटी की प्रगति की जानकारी मिलती रहेगी। साथ ही, मामले से जुड़े वकील भी अपनी शिकायतें और सुझाव कमेटी तक आसानी से पहुंचा सकेंगे।
प्रशांत भूषण ने सदस्य की निष्पक्षता पर उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने हाई पावर्ड कमेटी के एक सदस्य की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाया।
इस पर सॉलिसिटर जनरल ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता पक्ष के नजरिए से कुछ लोगों को छोड़कर बाकी सभी को बेईमान माना जा रहा है। इस दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने काफी विचार-विमर्श के बाद हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया है।
जंतर-मंतर घटना के प्रत्यक्षदर्शी को कोर्ट में लाया गया
सुनवाई के दौरान एक वकील जंतर-मंतर पर हुई घटना के एक प्रत्यक्षदर्शी को अदालत के सामने लेकर आए। उन्होंने गवाह को अपनी बात रखने की अनुमति देने का अनुरोध किया।
इस पर अदालत ने कहा कि मामले से जुड़े लोग हाई पावर्ड कमेटी के सामने अपनी बात रख सकते हैं। वकील ने ऐसे गवाहों के लिए अलग व्यवस्था की मांग की, जो खुद को असुरक्षित महसूस करते हैं।
असुरक्षित गवाहों के लिए नोडल अधिकारी की मांग
वकील की ओर से कहा गया कि कुछ गवाह अपनी पहचान को लेकर चिंतित हैं। ऐसे लोगों की बात सुनने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जा सकता है।
वकील ने एक 14 वर्षीय लड़की को भी असुरक्षित गवाह बताया। इसके बाद सुनवाई में नाबालिग की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा भी प्रमुखता से उठा।
14 साल की बच्ची को धमकी का मामला उठा
सुनवाई के दौरान वकील ने कोर्ट को बताया कि 14 साल की एक लड़की को कथित तौर पर धमकाया जा रहा है। वकील के मुताबिक, लड़की की ओर से दर्ज मामले के जवाब में उसके खिलाफ काउंटर FIR भी दर्ज कराई गई है।
वकील ने आरोप लगाया कि धमकी देने वाले लोग खुलेआम घूम रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि न्याय की मांग कर रही बच्ची को परेशान किए जाने की बात स्वीकार नहीं की जा सकती।
UP और दिल्ली से स्टेटस रिपोर्ट मांगेगा सुप्रीम कोर्ट
नाबालिग की सुरक्षा के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता दिखाई। अदालत ने कहा कि जरूरत होने पर बच्ची को सुरक्षा उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश और दिल्ली से स्टेटस रिपोर्ट मांगने की बात कही। इससे दोनों राज्यों की पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी अदालत के सामने आएगी।
सॉलिसिटर जनरल ने सोशल मीडिया दावों पर जताई आपत्ति
असुरक्षित गवाहों की पहचान छिपाने की मांग पर सॉलिसिटर जनरल ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सक्रिय कई लोग भी खुद को असुरक्षित गवाह बताते हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि जिसे कमेटी के सामने अपनी बात रखनी है, वह कमेटी के सचिव के माध्यम से अपनी शिकायत या जानकारी दे सकता है। वहीं, वरिष्ठ वकील हरिहरन ने कमेटी के लिए एक पोर्टल बनाने का सुझाव दिया।
मेट्रो स्टेशन बंद करने का मुद्दा भी पहुंचा SC
सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के समय मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने का मुद्दा भी सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया।
एक वकील ने इसे कथित तौर पर गैरकानूनी बताते हुए इस मुद्दे पर अलग से सुनवाई की मांग की। कोर्ट ने इस याचिका पर नोटिस जारी कर दिया। अब संबंधित पक्षों से जवाब मिलने के बाद इस पहलू पर आगे सुनवाई होगी।
कमेटी की अगली बैठक 15 सितंबर को
छात्र प्रदर्शन मामले में हाई पावर्ड कमेटी की अगली बैठक 15 सितंबर को प्रस्तावित है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कमेटी की कार्यप्रणाली, गवाहों की सुरक्षा और शिकायतों को दर्ज कराने की व्यवस्था जैसे मुद्दे सामने आए।
अब निगाहें कमेटी की अगली बैठक और दिल्ली-उत्तर प्रदेश पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट पर रहेंगी। इन रिपोर्ट्स के आधार पर मामले की आगे की दिशा तय हो सकती है।