श्रीगंगानगर NRI मर्डर केस: बेटी की शादी से 15 दिन पहले हत्या, शव जलाने वाले दंपती को उम्रकैद
श्रीगंगानगर में करीब चार साल पुराने सनसनीखेज NRI वीरेंद्र सिंह हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। एडीजे कोर्ट संख्या-1 के न्यायाधीश कमल लोहिया ने अबोहर निवासी रोहित और उसकी पत्नी जैसमीन उर्फ आशू को हत्या और सबूत मिटाने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत के फैसले के बाद सामने आया कि मृतक की बेटी की शादी की तैयारियां चल रही थीं और वारदात के महज 15 दिन बाद उसकी शादी होनी थी।
2022 में सामने आया था ब्लाइंड मर्डर का मामला
मामला 18 दिसंबर 2022 की रात का है। पुरानी आबादी क्षेत्र की एक कॉलोनी में 55 वर्षीय वीरेंद्र सिंह की हत्या कर शव को जलाने का मामला सामने आया था। वीरेंद्र चक-7 जैड क्षेत्र के निवासी थे और श्रीलंका की एक कंपनी में सुपरवाइजर के तौर पर काम करते थे।
घटना से करीब एक महीने पहले ही वे भारत लौटे थे। पुलिस जांच में सामने आया कि भारत आने के कुछ समय बाद रेलवे स्टेशन पर उनकी मुलाकात अबोहर निवासी डांसर जैसमीन उर्फ आशू से हुई थी।
डांसर से मुलाकात के बाद बढ़ी बातचीत
जांच के अनुसार वीरेंद्र और जैसमीन के बीच मुलाकात के बाद मोबाइल पर बातचीत और चैटिंग होने लगी। अभियोजन पक्ष के मुताबिक जैसमीन को वीरेंद्र के बैंक खातों में मौजूद रकम की जानकारी हो गई थी।
इसके बाद पुलिस जांच में आरोपियों द्वारा वीरेंद्र को घर बुलाने और पैसों को लेकर दबाव बनाने की बात सामने आई। अभियोजन पक्ष के अनुसार इसी दौरान जैसमीन का पति रोहित भी वहां पहुंचा था।
ATM, मोबाइल और पर्स छीनने का आरोप
अपर लोक अभियोजक विजेंद्र अग्रवाल के अनुसार आरोपियों ने वीरेंद्र से कथित तौर पर पैसे की मांग की और उनके साथ मारपीट की। आरोप है कि उनका एटीएम कार्ड, मोबाइल और पर्स छीन लिया गया।
अभियोजन के अनुसार आरोपियों ने वीरेंद्र से एटीएम का पासवर्ड भी लिया और उनके बैंक खाते से रकम ट्रांसफर की। इसके बाद उन्हें आशंका हुई कि वीरेंद्र पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दे सकते हैं।
सिर पर चोट के बाद गला घोंटकर हत्या का आरोप
अभियोजन पक्ष के मुताबिक आरोपियों ने वीरेंद्र के सिर पर चोट करने के बाद गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद पहचान छिपाने और सबूत मिटाने के लिए शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की गई।
बताया गया कि शव को घर में रखी प्लास्टिक की पानी की टंकी में डालकर रेहड़ी से सुनसान जगह ले जाया गया। वहां पेट्रोल डालकर टंकी और शव को आग लगा दी गई।
पैर का हिस्सा नहीं जलने से हुई पहचान
19 दिसंबर को वीरेंद्र के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसी दौरान पुलिस को जला हुआ शव मिला। शव का पैर का कुछ हिस्सा पूरी तरह नहीं जल पाया था, जिसके आधार पर परिजनों ने उसकी पहचान वीरेंद्र सिंह के रूप में की।
तत्कालीन पुरानी आबादी थाना प्रभारी सुरजीत कुमार ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने वीरेंद्र के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली तो उनकी अंतिम बातचीत जैसमीन के साथ होने की जानकारी सामने आई।
ऑनलाइन पेमेंट बनी जांच की अहम कड़ी
जांच के दौरान अगले दिन सामने आया ऑनलाइन पेमेंट का मैसेज भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग बना। पुलिस ने डिजिटल लेनदेन और मोबाइल से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
इसके बाद पुलिस ने अबोहर से जैसमीन और उसके पति रोहित को गिरफ्तार किया। मामले की जांच और अभियोजन की ओर से पेश साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी माना।
हत्या और सबूत मिटाने के मामले में उम्रकैद
एडीजे कोर्ट संख्या-1 के न्यायाधीश कमल लोहिया ने दोनों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और 201 के तहत दोषी ठहराया।
धारा 302 के तहत दोनों को आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 201 के तहत तीन-तीन साल के कठोर कारावास और 5-5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। परिवादी की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र पाराशर ने पैरवी की।
बेटी की शादी से 15 दिन पहले उजड़ गया परिवार
इस मामले का सबसे भावुक पहलू यह था कि वीरेंद्र सिंह की बेटी की शादी वारदात के करीब 15 दिन बाद होने वाली थी। परिवार शादी की तैयारियों में जुटा था, लेकिन इसी बीच वीरेंद्र की हत्या की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।
चार साल बाद अदालत के फैसले से मामले में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है |