जयपुर निगम चुनाव ग्राउंड रिपोर्ट: किशनपोल के 12 वार्डों में बागी-निर्दलीय बढ़ा रहे चुनौती
जयपुर नगर निगम चुनाव में किशनपोल विधानसभा क्षेत्र के 12 वार्डों पर इस बार खास नजर है। परिसीमन के बाद वार्ड 104 से 115 तक फैले इस इलाके में मुकाबला सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीमित नहीं दिखाई दे रहा। कई वार्डों में बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने दोनों प्रमुख दलों का चुनावी गणित मुश्किल कर दिया है। वहीं स्थानीय पकड़, सामाजिक समीकरण, पुराने कार्यकर्ताओं की नाराजगी और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि कई सीटों पर निर्णायक भूमिका निभा सकती है। इनमें वार्ड 110 और 112 सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
किशनपोल के 12 वार्डों में 1.94 लाख से ज्यादा मतदाता
किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में परिसीमन के बाद वार्ड 104 से 115 तक कुल 12 वार्ड हैं। इन सभी वार्डों में कुल 1,94,864 मतदाता हैं। इनमें वार्ड 113 में सबसे ज्यादा 27,883 मतदाता हैं, जबकि वार्ड 107 में सबसे कम 10,831 मतदाता हैं।
मतदाताओं की संख्या में इस अंतर के कारण अलग-अलग वार्डों में चुनावी रणनीति भी अलग नजर आ सकती है। बड़े वार्डों में बूथ मैनेजमेंट और व्यापक जनसंपर्क महत्वपूर्ण होगा, जबकि छोटे वार्डों में प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ और स्थानीय संपर्क ज्यादा असर डाल सकते हैं।
पुराने शहर की समस्याएं बनेंगी चुनावी मुद्दा
किशनपोल जयपुर के पुराने शहर का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां बाजारों और संकरी गलियों में यातायात का दबाव लंबे समय से बड़ी समस्या है। बारिश के दौरान कई इलाकों में जलभराव और सीवर से जुड़ी परेशानियां भी सामने आती हैं।
पुरानी हवेलियों और ऐतिहासिक बाजारों की पहचान को बनाए रखते हुए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी स्थानीय निकाय के सामने चुनौती है। इसके अलावा संकरी गलियों में पर्याप्त रोशनी, बाजार बंद होने के बाद सुरक्षा और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के बीच चर्चा में हैं।
टिकट वितरण में स्थानीय नेताओं की भूमिका अहम
किशनपोल के चुनावी समीकरण में टिकट वितरण भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बीजेपी की ओर से चंद्रमनोहर बटवाड़ा और पूर्व महापौर मोहनलाल गुप्ता की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है। वहीं कांग्रेस में किशनपोल विधायक अमीन कागजी की टिकट वितरण में भूमिका अहम रही है।
टिकट वितरण के बाद कुछ जगहों पर नाराजगी और बागी प्रत्याशियों की मौजूदगी ने दोनों प्रमुख दलों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब पार्टियों की कोशिश अधिक से अधिक वोटरों को अपने अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में लामबंद करने की होगी।
वार्ड 110 में पूर्व महापौर के मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक
वार्ड 110 इस बार किशनपोल की सबसे चर्चित सीटों में शामिल है। यहां कांग्रेस की सुनीता मेठी और बीजेपी की ज्योति खंडेलवाल आमने-सामने हैं। ज्योति खंडेलवाल जयपुर की महापौर रह चुकी हैं, ऐसे में उनके मैदान में होने से इस वार्ड की चुनावी चर्चा बढ़ गई है।
वहीं बीजेपी की बागी प्रत्याशी बीना मेठी और निर्दलीय सोना जैन की मौजूदगी भी मुकाबले को प्रभावित कर सकती है। यदि बागी और निर्दलीय प्रत्याशी अपने पक्ष में पर्याप्त वोट जुटाते हैं तो दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के लिए वोटों का विभाजन चुनौती बन सकता है।
वार्ड 112 में संगठन बनाम स्थानीय पकड़ की चर्चा
वार्ड 112 में कांग्रेस के आशीष शर्मा का मुकाबला बीजेपी के वरिष्ठ संगठनात्मक चेहरे सुनील कोठारी से है। कोठारी लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं, इसलिए बीजेपी के लिए यह सीट संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दूसरी ओर आशीष शर्मा की वार्ड में स्थानीय पकड़ को मुकाबले का अहम पहलू बताया जा रहा है। ऐसे में यहां चुनाव को संगठन की ताकत और स्थानीय जनसंपर्क के बीच मुकाबले के तौर पर देखा जा रहा है। वार्ड में कुल चार प्रत्याशी मैदान में हैं।
वार्ड 104 में सात प्रत्याशी, वोट बंटने की चुनौती
वार्ड 104 में कांग्रेस के अब्दुल लतीफ कुरैशी और बीजेपी के ज्ञानचंद खंडेलवाल के बीच मुख्य मुकाबला है। लेकिन कुल सात प्रत्याशियों के मैदान में होने से वोटों के बंटवारे की संभावना भी बनी हुई है।
ऐसे में दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के लिए अपने परंपरागत वोट के साथ-साथ अन्य मतदाताओं तक पहुंच बनाना महत्वपूर्ण होगा। स्थानीय मुद्दे और व्यक्तिगत संपर्क यहां मुकाबले की दिशा प्रभावित कर सकते हैं।
वार्ड 105 से 109 तक अलग-अलग समीकरण
वार्ड 105 में कांग्रेस के महेश तंबोली और बीजेपी के हंसराज चौहान आमने-सामने हैं। यहां संगठन की सक्रियता के साथ प्रत्याशी का व्यक्तिगत जनसंपर्क महत्वपूर्ण हो सकता है।
वार्ड 106 में कांग्रेस के जुगल किशोर और बीजेपी के चंद्रप्रकाश के बीच मुकाबला है। इस सीट पर सामाजिक समीकरण और स्थानीय समस्याएं चुनावी मुद्दा बन सकती हैं।
वार्ड 107 में कांग्रेस की खुशबू शर्मा और बीजेपी की अनुराधा माहेश्वरी के बीच मुकाबला है। निर्दलीय निशा पारीक की मौजूदगी से यहां चुनावी गणित और दिलचस्प हो गया है।
वार्ड 108 में कांग्रेस की मेहरू निशा और बीजेपी की मीनाक्षी आमने-सामने हैं। इस वार्ड में पांच प्रत्याशी मैदान में हैं।
वार्ड 109 में कांग्रेस के मोहम्मद अयूब और बीजेपी के जाकिर हुसैन खान के बीच मुकाबला है। यहां कुल आठ प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें सात मुस्लिम प्रत्याशी बताए गए हैं। ऐसे में वोटों का बंटवारा इस सीट का अहम पहलू हो सकता है।
वार्ड 111 में कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज
वार्ड 111 का चुनावी समीकरण अन्य वार्डों से अलग है। यहां कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन खारिज हो चुका है। बीजेपी की ओर से संजय मैदान में हैं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशी योगेंद्र और नरेश शर्मा भी चुनाव लड़ रहे हैं।
कांग्रेस प्रत्याशी के मैदान से बाहर होने के बाद इस वार्ड में मुकाबले की दिशा बदल गई है। अब बीजेपी प्रत्याशी के सामने निर्दलीय उम्मीदवारों की चुनौती है।
वार्ड 113 से 115 तक भी सीधा मुकाबला
वार्ड 113 में कांग्रेस के गजनफर अली और बीजेपी के फरीदुद्दीन आमने-सामने हैं। यह किशनपोल के सबसे अधिक मतदाताओं वाले वार्डों में है, जहां कुल 27,883 मतदाता हैं।
वार्ड 114 में कांग्रेस के मोहम्मद जकारिया और बीजेपी के नवीन शर्मा के बीच मुकाबला है। वहीं वार्ड 115 में कांग्रेस के सुरेश बिवाल और बीजेपी के सूरज गोडीवाल आमने-सामने हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बीजेपी की सूची में वार्ड 115 एससी आरक्षण वाली सीट है।
बागी और निर्दलीय बिगाड़ सकते हैं पार्टियों का गणित
किशनपोल के कई वार्डों में बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी इस चुनाव की बड़ी खासियत है। खासतौर पर जहां प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के खिलाफ उनके ही खेमे से जुड़े चेहरे मैदान में हैं, वहां वोटों का विभाजन मुकाबले को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि बागी या निर्दलीय प्रत्याशी कितना प्रभाव डालेंगे, इसका वास्तविक आकलन मतदान के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल दोनों प्रमुख दलों के सामने अपने समर्थक वोटों को एकजुट रखने की चुनौती है।
स्थानीय लोगों की प्राथमिकता: सड़क, सीवर और ट्रैफिक
किशनपोल के बाजारों और मोहल्लों में स्थानीय समस्याएं चुनावी चर्चा का बड़ा हिस्सा हैं। यातायात जाम, सड़क के बीच तक वाहनों की पार्किंग, सीवरेज और बारिश में जलभराव जैसी समस्याएं लोगों के बीच लंबे समय से चर्चा में हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे ऐसे प्रत्याशी को प्राथमिकता देना चाहते हैं जो चुनाव जीतने के बाद इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी तरीके से काम कर सके। पुराने शहर की सुविधाओं और ऐतिहासिक पहचान के बीच संतुलन बनाना भी आने वाले पार्षदों के लिए बड़ी जिम्मेदारी होगी।
किशनपोल में बूथ-दर-बूथ मुकाबले के संकेत
किशनपोल के 12 वार्डों का चुनावी परिदृश्य बताता है कि यहां किसी एकतरफा लहर की बजाय स्थानीय समीकरण महत्वपूर्ण हो सकते हैं। प्रत्याशी की व्यक्तिगत स्वीकार्यता, सामाजिक समीकरण, पार्टी संगठन, बागी उम्मीदवार और निर्दलीय प्रत्याशी—इन सभी का असर चुनाव परिणाम पर पड़ सकता है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि मतदान के दिन मतदाता पार्टी के चुनाव चिह्न को प्राथमिकता देते हैं या स्थानीय प्रत्याशी और क्षेत्रीय मुद्दों को। किशनपोल में यही फैक्टर कई वार्डों में जीत-हार का अंतर तय कर सकता है।