सोनम वांगचुक ने अनशन खत्म करने की रखी शर्त, सरकार से मांगा लिखित आश्वासन
शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने संकेत दिया है कि वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए उन्होंने केंद्र सरकार से आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट लिखित आश्वासन मांगा है। वांगचुक ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य केवल छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार सुनिश्चित करना है।
सरकार के सामने रखी स्पष्ट शर्त
सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया मंच X पर साझा खुले पत्र में लिखा कि यदि केंद्र सरकार यह लिखित भरोसा देती है कि आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा के खिलाफ प्रतिशोधात्मक या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तो वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने पर विचार करेंगे। उनके अनुसार आंदोलन से जुड़े युवाओं ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें रखी हैं और उन्हें इसके लिए किसी तरह की कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए।
केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात का किया जिक्र
वांगचुक ने अपने पत्र में बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर उनसे मुलाकात की और अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने दावा किया कि बातचीत के दौरान सरकार की ओर से उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का भरोसा दिया गया। वांगचुक के अनुसार चर्चा का केंद्र शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों से जुड़े मुद्दों का समाधान रहा।
शिक्षा सुधार और जवाबदेही पर दिया जोर
अपने पत्र में वांगचुक ने कहा कि परीक्षा पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों छात्रों का विश्वास प्रभावित किया है। उन्होंने मांग की कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाएं, परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़े गंभीर विषयों पर संसद में सार्थक चर्चा होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
‘चलो संसद’ मार्च को बताया शांतिपूर्ण आंदोलन
वांगचुक ने हाल ही में आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। उन्होंने दावा किया कि प्रतिभागियों ने पूरे आंदोलन के दौरान संयम बनाए रखा और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखी। उन्होंने सरकार से अपील की कि आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक कार्रवाई न की जाए और आगे भी किसी प्रकार के अनावश्यक बल प्रयोग से बचा जाए।
65 सांसदों ने भी अनशन समाप्त करने का किया आग्रह
वांगचुक ने बताया कि विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने की अपील की है। उनके अनुसार कई सांसद व्यक्तिगत रूप से उनसे मिलने भी पहुंचे और उन्होंने स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए आंदोलन समाप्त करने का अनुरोध किया। वांगचुक ने कहा कि वह सभी के आग्रह का सम्मान करते हैं, लेकिन छात्रों के हितों और आंदोलन के मूल उद्देश्य से समझौता नहीं कर सकते।
लोकतंत्र में संवाद को बताया सबसे महत्वपूर्ण
अपने संदेश के अंत में सोनम वांगचुक ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की मजबूती इस बात से तय होती है कि वह असहमति रखने वाले नागरिकों, विशेषकर युवाओं, की बात किस तरह सुनता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार लिखित रूप से भरोसा देती है कि आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तो वह विश्वास के साथ अपना अनशन समाप्त कर देंगे। उनके अनुसार संवाद और पारदर्शिता ही लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।