सोनभद्र में सर्पदंश बना जानलेवा संकट, तीन साल में 199 लोगों की मौत
उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में सर्पदंश लगातार गंभीर जनस्वास्थ्य चुनौती बनता जा रहा है। मानसून शुरू होते ही सांपों के निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं और इसके साथ ही सर्पदंश के मामले भी तेजी से सामने आने लगते हैं। पिछले तीन वर्षों में जिले में 199 लोगों की मौत सांप के काटने से हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर इलाज न मिलना, अस्पतालों की दूरी और झाड़-फूंक जैसी परंपरागत मान्यताओं के कारण कई लोगों की जान चली जाती है।
तीन वर्षों में 199 लोगों ने गंवाई जान
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार सोनभद्र में सर्पदंश से मौतों का सिलसिला लगातार जारी है। वर्ष 2023-24 में 69 लोगों, वर्ष 2024-25 में 62 लोगों और वर्ष 2025-26 में 68 लोगों की मृत्यु दर्ज की गई। ये आंकड़े केवल उन मामलों पर आधारित हैं जिनमें पोस्टमार्टम के बाद सरकारी रिकॉर्ड में मौत दर्ज हुई और राहत सहायता दी गई। प्रशासन का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामलों में परिजन पोस्टमार्टम नहीं कराते और मौतें आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल नहीं हो पातीं।
झाड़-फूंक के कारण उपचार में होती है देरी
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सर्पदंश के बाद बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंचने की बजाय झाड़-फूंक और पारंपरिक उपचार का सहारा लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यही देरी कई बार जानलेवा साबित होती है। कई गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं दूर होने और परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग पहले स्थानीय ओझाओं या झाड़-फूंक करने वालों के पास पहुंच जाते हैं। इस दौरान बहुमूल्य समय निकल जाता है और मरीज की हालत गंभीर हो जाती है, जिससे मृत्यु का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
जंगलों में पाए जाते हैं अत्यंत विषैले सांप
सोनभद्र उत्तर प्रदेश का सबसे अधिक वन क्षेत्र वाला जिला माना जाता है। यहां के घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों में कोबरा, करैत और रसेल वाइपर जैसे अत्यंत विषैले सांप बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। यही कारण है कि जिले में सर्पदंश की घटनाएं अन्य जिलों की तुलना में अधिक देखने को मिलती हैं। मानसून के दौरान जलभराव और नमी बढ़ने पर सांप आबादी वाले क्षेत्रों की ओर भी निकल आते हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में खतरा और बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई तैयारी
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्रमुख अस्पतालों में एंटी स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में तत्काल उपचार सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य संस्थानों को विशेष निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चिकित्सा कर्मियों को भी ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार रखा गया है ताकि मरीजों को समय पर जीवनरक्षक उपचार मिल सके।
गांव-गांव चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों, आंगनबाड़ी केंद्रों, स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर तथा जनसंदेश के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि सांप काटने के बाद झाड़-फूंक की बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय है।
समय पर इलाज से बच सकती है जान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सर्पदंश के बाद शुरुआती कुछ घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि पीड़ित को जल्द अस्पताल पहुंचाकर एंटी स्नेक वेनम दिया जाए तो अधिकांश मामलों में जान बचाई जा सकती है। डॉक्टरों का सुझाव है कि सांप काटने की स्थिति में घबराने की बजाय मरीज को शांत रखें और तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाएं। जागरूकता और समय पर चिकित्सा सुविधा ही सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने का सबसे प्रभावी तरीका माना जा रहा है।