Rajasthan Crime News: संयम लोढ़ा को क्यों निशाना बनाना चाहता था लॉरेंस गैंग? शूटरों की रेकी से हथियार बरामदगी तक बड़ा खुलासा
राजस्थान के सिरोही से कांग्रेस के पूर्व विधायक संयम लोढ़ा को कथित तौर पर निशाना बनाने की साजिश का खुलासा हुआ है। राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और जोधपुर पुलिस ने लॉरेंस बिश्नोई-आर्जू बिश्नोई गैंग से जुड़े दो इनामी शूटरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, दोनों ने सिरोही में संयम लोढ़ा के फार्म हाउस की कई दिनों तक रेकी की थी। उनके मोबाइल से लोढ़ा की तस्वीरें भी मिलने की बात सामने आई है। निकाय चुनाव के दौरान फार्म हाउस पर बढ़ी भीड़ के कारण कथित हमले का मौका नहीं मिल सका। इसके बाद दोनों जोधपुर पहुंचे, जहां पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
दो इनामी शूटर जोधपुर से गिरफ्तार
AGTF और जोधपुर पुलिस ने लॉरेंस बिश्नोई-आर्जू बिश्नोई गैंग से जुड़े दो कथित शार्प शूटरों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान पंजाब के फाजिल्का निवासी जसकरण सिंह उर्फ करण उर्फ सन्नी उर्फ कट्टा और अबोहर निवासी राजिंदर उर्फ बिल्ला के रूप में हुई है।पंजाब पुलिस ने दोनों पर पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। राजस्थान पुलिस के मुताबिक दोनों पंजाब के आपराधिक मामलों में भी वांछित थे।
फार्म हाउस की कई दिनों तक रेकी का दावा
पुलिस जांच के मुताबिक दोनों शूटरों ने सिरोही में संयम लोढ़ा के फार्म हाउस के आसपास कई दिनों तक रेकी की।जांच में सामने आया कि फार्म हाउस के पास पहाड़ी इलाके से लोढ़ा की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। शूटर कथित तौर पर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे थे कि लोढ़ा कब फार्म हाउस आते हैं, उनसे कौन मिलने आता है और वारदात के बाद किस रास्ते से निकलना आसान होगा।शूटरों के मोबाइल फोन से संयम लोढ़ा की तस्वीरें मिलने की बात भी पुलिस जांच में सामने आई है।
निकाय चुनाव के कारण नहीं मिला हमला करने का मौका
पुलिस के अनुसार जिस दौरान शूटर फार्म हाउस के आसपास मौजूद थे, उसी समय निकाय चुनाव की गतिविधियां चल रही थीं।फार्म हाउस पर पार्षदों की बाड़ेबंदी और समर्थकों की बड़ी संख्या में मौजूदगी के कारण वहां लगातार लोगों की आवाजाही बनी रही। पुलिस के मुताबिक, भीड़ और सुरक्षा के बीच शूटरों को कथित वारदात के लिए अनुकूल मौका नहीं मिला।इसके बाद दोनों ने अपना प्लान बदल दिया और सिरोही से जोधपुर पहुंच गए।
आखिर संयम लोढ़ा को क्यों बनाया गया निशाना?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। पुलिस पूछताछ में शूटरों की ओर से दावा किया गया कि संयम लोढ़ा और उनके भाई के बीच वैचारिक मतभेद थे और इसी वजह से उन्हें निशाना बनाने की योजना बनाई गई।हालांकि पुलिस ने इस दावे को अभी अंतिम वजह नहीं माना है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि वास्तव में हमले का आदेश किसने दिया था और शूटरों को लोढ़ा को निशाना बनाने का इनपुट किससे मिला।इसलिए फिलहाल पारिवारिक या वैचारिक मतभेद को पुलिस जांच में सामने आया एक दावा ही माना जा सकता है, अंतिम कारण नहीं।
विदेश से ऑपरेट होने वाले नेटवर्क की जांच
पुलिस जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े आर्जू बिश्नोई और उसके सहयोगी सुमित सन्नी का नाम भी सामने आने की रिपोर्ट है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस का दावा है कि इस ऑपरेशन के लिए दोनों शूटरों को नेपाल से राजस्थान भेजा गया था। AGTF के अनुसार, दोनों पहले पंजाब के हत्या के मामलों के बाद नेपाल चले गए थे और बाद में भारत लौटे।
फर्जी आधार कार्ड से होटल में रुके
जांच में सामने आया कि दोनों आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल किया।रिपोर्टों के मुताबिक, 17 सितंबर की शाम दोनों ब्यावर-पिंडवाड़ा हाईवे के पास एक होटल पहुंचे और फर्जी पहचान के आधार पर कमरा लिया। दोनों करीब 14 घंटे होटल में रुके और अगले दिन सुबह वहां से निकल गए।पुलिस ने होटल और आसपास के स्थानों के CCTV फुटेज भी जांचे हैं।
पाली की झाड़ियों से विदेशी हथियार बरामद
पूछताछ के बाद पुलिस को पाली-सिरोही हाईवे के पास हथियारों की खेप मिलने की जानकारी सामने आई।पुलिस के अनुसार, ढोला गांव के पास हाईवे से करीब 200 मीटर दूर झाड़ियों में कपड़े के थैले में हथियार छिपाए गए थे। वहां से तुर्की निर्मित जिगाना पिस्टल, ऑस्ट्रिया निर्मित ग्लॉक पिस्टल, चार मैगजीन और 36 जिंदा कारतूस बरामद किए गए।पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि हथियार किसने उपलब्ध कराए और उनका इस्तेमाल किस वारदात के लिए किया जाना था।
मारवाड़ के कारोबारी को भी निशाना बनाने की जांच
जांच में एक और पहलू सामने आया है। पुलिस को संदेह है कि शूटरों के निशाने पर मारवाड़ का एक बड़ा कारोबारी भी था।रिपोर्टों के मुताबिक, कारोबारी की रेकी और उसके बाद करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने की संभावित साजिश की भी जांच की जा रही है। पुलिस सुमेरपुर और शिवगंज क्षेत्र के कुछ कारोबारियों से जुड़ी जानकारी भी खंगाल रही है।
हरियाणा से लोकल सपोर्ट की आशंका
जांच एजेंसियों को शूटरों को स्थानीय स्तर पर मदद मिलने का भी संदेह है। पुलिस के अनुसार, हरियाणा के अपराध नेटवर्क से जुड़े लोगों द्वारा लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराए जाने की जांच की जा रही है।रिपोर्टों के मुताबिक, हरियाणा से तीन संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है। इसके अलावा कई अन्य संदिग्ध भी पुलिस की निगरानी में हैं।जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि शूटरों के लिए बाइक, ठहरने और अन्य लॉजिस्टिक व्यवस्था किसने की।
बाइक और स्थानीय नेटवर्क की भी जांच
पुलिस जांच में स्थानीय स्तर पर शूटरों को आवाजाही के साधन उपलब्ध कराने का पहलू भी सामने आया है।रिपोर्टों में सिरोही में नई बाइक उपलब्ध कराए जाने और स्थानीय मदद की बात कही गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बाइक किसने खरीदी, उसका भुगतान किसने किया और शूटरों तक उसे कैसे पहुंचाया गया।इन कड़ियों के जरिए जांच एजेंसियां कथित स्थानीय नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
AGTF की जांच में कई कड़ियां जुड़ीं
जोधपुर में गिरफ्तारी के बाद AGTF की टीम आरोपियों को सिरोही लेकर गई और उन स्थानों की मौका तस्दीक की, जहां उनके ठहरने और आवाजाही की जानकारी मिली थी।पुलिस होटल, CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा, हथियारों की बरामदगी और संदिग्धों के संपर्कों को आपस में जोड़कर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब यही है कि संयम लोढ़ा को निशाना बनाने का अंतिम आदेश किसने दिया और इसके पीछे वास्तविक मकसद क्या था।
संयम लोढ़ा की सुरक्षा की समीक्षा
मोबाइल फोन में संयम लोढ़ा की तस्वीरें मिलने की जानकारी के बाद उनकी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई है।सिरोही पुलिस की ओर से इसे सुरक्षा प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है। फिलहाल जांच एजेंसियां साजिश की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी हैं। आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल तथा भौतिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।