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जोधपुर में रिटायर्ड एएसपी की आत्महत्या: नए घर में शिफ्ट हुए चार दिन बाद ही उठाया आत्मघाती कदम

जोधपुर के लालसागर में रिटायर्ड एएसपी दशरथसिंह चारण ने अवसाद के चलते नए घर में फंदा लगाकर जान दी, चार दिन पहले ही हुए थे शिफ्ट।

नए घर में पहली रातें, फिर अचानक दुखद अंत

जोधपुर के मंडोर थाना क्षेत्र स्थित लालसागर इलाके से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। राजस्थान पुलिस के रिटायर्ड अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दशरथसिंह चारण ने गुरुवार दोपहर अपने नए घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मूल रूप से नागौर के सुरपुरा निवासी दशरथसिंह करीब दो साल पहले सेवानिवृत्त हुए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि वे मात्र चार दिन पहले ही अपने नए मकान में शिफ्ट हुए थे। नई शुरुआत की उम्मीदें बुनते परिवार पर यह आघात बेहद दर्दनाक साबित हुआ।

घटना का वक्त: पत्नी पड़ोस में, अकेलेपन में उठाया कदम

मंडोर थानाधिकारी शेषकरण के अनुसार, गुरुवार दोपहर करीब 3 से 4 बजे के बीच यह हादसा हुआ। उस वक्त दशरथसिंह घर पर बिल्कुल अकेले थे। उनकी पत्नी कुछ समय के लिए पड़ोस में किसी काम से गई हुई थीं। जब वे वापस लौटीं, तो पति को फंदे से लटका देख उनकी चीख निकल गई। तुरंत पड़ोसियों और पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। आसपास के लोग इस घटना से स्तब्ध हैं, क्योंकि दशरथसिंह को कोई भी आत्मघाती कदम उठाने वाला व्यक्ति नहीं मानता था।

पुलिस जांच: अवसाद या कोई और वजह?

घटना की सूचना मिलते ही मंडोर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में ले लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया गया है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में अवसाद को संभावित कारण माना जा रहा है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और परिवार के बयानों के बाद ही होगी। क्या सेवानिवृत्ति के बाद की मानसिक उथल-पुथल, नए शहर में एडजस्टमेंट की चुनौती या कोई व्यक्तिगत कारण इस कदम के पीछे थे? ये सवाल अभी अनुत्तरित हैं।

पुलिस महकमे में शोक, सहयोगियों ने दी श्रद्धांजलि

दशरथसिंह चारण के निधन की खबर सुनते ही राजस्थान पुलिस महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। उनके पूर्व सहयोगियों, वरिष्ठ अधिकारियों और अधीनस्थ कर्मचारियों ने गहरे दुख की अभिव्यक्ति की है। सेवाकाल के दौरान दशरथसिंह को एक ईमानदार और समर्पित अधिकारी के रूप में जाना जाता था। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई थीं। पुलिस विभाग ने परिवार को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया है। सोशल मीडिया पर भी पूर्व अधिकारी के प्रति श्रद्धांजलि संदेशों की बाढ़ आ गई है।

मानसिक स्वास्थ्य: सेवानिवृत्ति के बाद की चुनौतियां

यह घटना सेवानिवृत्त अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर एक गंभीर चर्चा को जन्म देती है। लंबी सेवा के बाद अचानक रूटीन बदलना, जिम्मेदारियों का अभाव और नई पहचान तलाशने की चुनौती कई बार अवसाद का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद परिवार और समाज का सहयोग, नए शौक अपनाना और आवश्यकता पड़ने पर पेशेवर काउंसलिंग लेना बेहद जरूरी है। दशरथसिंह का मामला हमें याद दिलाता है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर संवेदनशील रहना और समय पर मदद मांगना जीवन रक्षक हो सकता है।

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