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रवि किशन बोले- श्रीराम का किरदार निभाने में लग रहा डर, कहा- गलती की कोई गुंजाइश नहीं

अभिनेता और सांसद रवि किशन जल्द ही रामलीला में भगवान श्रीराम की भूमिका निभाते नजर आएंगे। 19 और 20 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली अयोध्या की रामलीला में वह श्रीराम का किरदार निभाएंगे। इस भूमिका को लेकर अभिनेता ने अपनी घबराहट जाहिर की है। उनका कहना है कि श्रीराम जैसे मर्यादित चरित्र को मंच पर प्रस्तुत करना बड़ी जिम्मेदारी है। वह चाहते हैं कि उनसे कोई गलती न हो। रवि किशन इस भूमिका को केवल अभिनय नहीं, बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव के रूप में देख रहे हैं।

पहली बार श्रीराम के रूप में नजर आएंगे रवि किशन

रवि किशन ने ‘एचटी सिटी’ से बातचीत में बताया कि पहली बार उन्हें भगवान श्रीराम का रूप धारण करने का अवसर मिला है। उन्होंने प्रार्थना की है कि भगवान श्रीराम उन्हें ऐसी ऊर्जा दें, जिससे वह इस भूमिका को पूरी गरिमा और शालीनता के साथ निभा सकें। अभिनेता के मुताबिक, श्रीराम का किरदार निभाना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। वह इस जिम्मेदारी को लेकर गंभीर हैं और अपनी ओर से कोई कमी नहीं छोड़ना चाहते।

श्रीराम की भूमिका को लेकर क्यों हैं घबराए हुए?

रवि किशन का कहना है कि मंच पर जाने से पहले कलाकार के मन में घबराहट होना स्वाभाविक है। लेकिन भगवान श्रीराम का किरदार निभाते समय यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। उनके अनुसार, इस चरित्र की मर्यादा और गरिमा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। वह नहीं चाहते कि अभिनय के दौरान कोई ऐसी गलती हो, जिससे किरदार की छवि प्रभावित हो। इसी वजह से वह इस भूमिका को लेकर विशेष सावधानी बरत रहे हैं।

परशुराम, केवट और श्रीकृष्ण का किरदार भी निभा चुके हैं

रवि किशन इससे पहले परशुराम और केवट जैसे पात्रों की भूमिका निभा चुके हैं। बचपन में उन्होंने माता सीता का किरदार भी निभाया था। इसके अलावा वह एक टीवी धारावाहिक में भगवान श्रीकृष्ण के रूप में भी नजर आ चुके हैं। हालांकि, उनके लिए भगवान श्रीराम की भूमिका अलग महत्व रखती है। उनका मानना है कि इस चरित्र को प्रस्तुत करते समय कलाकार को संवादों के साथ-साथ भाव-भंगिमा और व्यवहार में भी संयम रखना चाहिए।

कैमरे और मंच पर अभिनय के अंतर पर कही बात

अभिनेता ने मंच और कैमरे के सामने अभिनय करने के अंतर पर भी बात की। उनके मुताबिक, श्रीराम जैसे चरित्र में कलाकार अपनी ओर से मनमाने बदलाव नहीं कर सकता। संवाद, पटकथा और चरित्र की मर्यादा का ध्यान रखना जरूरी है। रवि किशन ने कहा कि इंसान से गलती हो सकती है, लेकिन वह इस भूमिका को निभाने में अपना शत-प्रतिशत देने की कोशिश करेंगे। उनके लिए यह किरदार अनुशासन और एकाग्रता की परीक्षा भी है।

धार्मिक माहौल में बीता बचपन, तैयारी में जुटे अभिनेता

रवि किशन ने बताया कि उनका बचपन धार्मिक वातावरण में बीता है। पुजारी के बेटे होने के कारण उन्होंने बचपन से भगवान श्रीराम और महादेव से जुड़ी कथाएं सुनी हैं। यही वजह है कि श्रीराम की भूमिका उनके लिए भावनात्मक महत्व रखती है। अभिनेता के अनुसार, इस किरदार में चेहरे पर सौम्यता, व्यवहार में शालीनता और अभिनय में संयम दिखाई देना चाहिए। वह मंच पर इन सभी पहलुओं का ध्यान रखने की तैयारी कर रहे हैं।

व्रत, डाइट और लुक पर भी दे रहे ध्यान

रवि किशन ने बताया कि वह रामलीला से पहले अपनी तैयारी पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। नवरात्रि के दौरान व्रत रखने की बात भी उन्होंने कही। वह अपनी शारीरिक बनावट और रूप को किरदार के अनुरूप रखने के लिए विशेष डाइट ले रहे हैं। श्रीराम का रूप अपनाने के लिए वह मूंछें हटाने की तैयारी भी कर रहे हैं। अभिनेता चाहते हैं कि मंच पर उनका रूप और अभिनय दोनों किरदार की गरिमा के अनुरूप हों।

19 और 20 अक्टूबर को होगा रामलीला का आयोजन

रवि किशन 19 और 20 अक्टूबर को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली अयोध्या की रामलीला में भगवान श्रीराम की भूमिका निभाएंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आयोजन का प्रसारण दूरदर्शन, ओटीटी और यूट्यूब के माध्यम से भी किया जाएगा। ऐसे में बड़ी संख्या में दर्शकों तक उनका अभिनय पहुंचने की उम्मीद है। रवि किशन के लिए यह अवसर लंबे समय से जुड़ी इच्छा को पूरा करने जैसा है। अब दर्शकों की नजर उनके श्रीराम के रूप में मंच पर आने पर रहेगी।


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