राम मंदिर ट्रस्ट पर उठे सवाल: संजय राउत ने कोषाध्यक्ष की जांच की मांग, ‘राम रक्षा’ अभियान का दिया न्योता
अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत ने ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष की जांच की मांग उठाई है। राउत का कहना है कि यदि किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी कोषाध्यक्ष के कार्यकाल में हुई है, तो निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को नागपुर में शुरू होने वाले ‘राम रक्षा’ अभियान में शामिल होने का निमंत्रण भी भेजा है।
कोषाध्यक्ष की भूमिका पर उठाए सवाल
संजय राउत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यदि राम मंदिर ट्रस्ट की तिजोरी या वित्तीय प्रबंधन में किसी प्रकार की कथित अनियमितता हुई है, तो उसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उनके अनुसार ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी मंदिर के फंड और खातों की निगरानी करना होती है, इसलिए जांच के दायरे में संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच से ही सच्चाई सामने आएगी।
‘सिर्फ ऑडिट नहीं, व्यापक जांच की जरूरत’
राउत ने कहा कि राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसके निर्माण में समाज के हर वर्ग का योगदान रहा है। ऐसे में यदि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं, तो केवल ऑडिट कराना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि इतने महत्वपूर्ण धार्मिक संस्थान के लिए मजबूत वित्तीय निगरानी और पारदर्शी व्यवस्था आवश्यक है, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।
मुख्यमंत्री फडणवीस को भेजा निमंत्रण
शिवसेना (UBT) सांसद ने बताया कि उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर 18 जुलाई से नागपुर में शुरू होने वाले ‘राम रक्षा’ अभियान में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। यह कार्यक्रम उद्धव ठाकरे की मौजूदगी में आयोजित किया जाएगा। राउत ने पत्र में कहा कि भगवान राम के प्रति आस्था रखने वाले सभी लोगों को मंदिर से जुड़े विवादों और आरोपों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
जनजागरूकता अभियान का दावा
संजय राउत ने कहा कि ‘राम रक्षा’ अभियान का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर जनजागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मुद्दे पर सभी पक्ष पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहयोग करेंगे।