राम मंदिर चढ़ावा विवाद: गोविंद देव गिरि बोले- गलती नहीं तो इस्तीफा क्यों दूं
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी विवाद के बीच ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उनकी भूमिका मंदिर को प्राप्त धन के लेखा-जोखा और बैंक संबंधी व्यवस्था तक सीमित रही है, जबकि चढ़ावे की गणना प्रक्रिया की जिम्मेदारी उनकी नहीं थी। गिरि ने इस्तीफे की मांग को खारिज करते हुए कहा कि जब उनकी कोई व्यक्तिगत गलती नहीं है तो वह पद क्यों छोड़ें। साथ ही उन्होंने पूर्व महासचिव चंपत राय का बचाव करते हुए निगरानी में हुई लापरवाही को गंभीर मामला बताया।
चढ़ावा चोरी विवाद पर गोविंद देव गिरि का बड़ा बयान
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में उनकी कोई प्रत्यक्ष गलती नहीं है, इसलिए इस्तीफा देने का कोई कारण नहीं बनता। गिरि के अनुसार उनका काम ट्रस्ट के खाते में आने वाली राशि की देखरेख, लेखा व्यवस्था और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ा था, जबकि मंदिर में चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़ी प्रक्रिया अलग जिम्मेदारी के तहत आती थी। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
चंपत राय का किया बचाव, बोले- भरोसे का हुआ गलत इस्तेमाल
गोविंद देव गिरि ने ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने किसी को धोखा नहीं दिया, बल्कि कुछ लोगों पर किया गया भरोसा गलत साबित हुआ। गिरि ने कहा कि चंपत राय लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं और उनकी नीयत पर सवाल उठाना उचित नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि चढ़ावे के प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियां रहीं। उनके अनुसार इतनी बड़ी धार्मिक संस्था में व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी बेहद जरूरी थी, जिसमें कमी रह गई।
अखिलेश यादव के बयान से पहले मिली थी चोरी की जानकारी
गोविंद देव गिरि के मुताबिक चढ़ावा चोरी मामले की जानकारी ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों को सोशल मीडिया पर मामला उठने से पहले ही मिल गई थी। उन्होंने बताया कि चंपत राय को भी इस संबंध में शुरुआती जानकारी मिल गई थी, लेकिन शुरुआत में यह स्पष्ट नहीं था कि शिकायत किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत की जाए। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की मांग की गई। गिरि ने कहा कि विवाद सामने आने के बाद ट्रस्ट ने आवश्यक कदम उठाए और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
लापरवाही स्वीकार, लेकिन व्यक्तिगत जिम्मेदारी से इनकार
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर गोविंद देव गिरि ने प्रशासनिक लापरवाही की बात स्वीकार की है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी व्यवस्था में यदि लंबे समय तक निगरानी कमजोर रही तो यह गंभीर विषय है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि चोरी की घटना में उनकी कोई भूमिका नहीं है। गिरि ने कहा कि ट्रस्ट के सभी जिम्मेदार लोगों को व्यवस्थाओं की समीक्षा करनी चाहिए थी। उन्होंने भरोसा जताया कि जांच के बाद वास्तविक दोषियों की पहचान होगी और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस्तीफे की मांग पर गोविंद देव गिरि का दो टूक जवाब
कोषाध्यक्ष पद से इस्तीफे की मांग पर गोविंद देव गिरि ने साफ कहा कि जब उनकी कोई गलती सामने नहीं आई है तो वह पद क्यों छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी को समझते हैं और ट्रस्ट के हित में काम कर रहे हैं। गिरि के मुताबिक वित्तीय व्यवस्था की जिम्मेदारी निभाते हुए उन्होंने हमेशा पारदर्शिता बनाए रखने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
ट्रस्ट में बदलाव और जांच पर बनी नजर
राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद ट्रस्ट की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठे हैं। मामले की जांच के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्थाओं में सुधार की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। फिलहाल जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।