राकेश टिकैत का सरकार पर हमला, बोले- छात्रों पर सिर्फ लाठीचार्ज नहीं, लोकतांत्रिक आवाज दबाने की कोशिश हुई
दिल्ली में छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध और किसानों की लंबित मांगों को लेकर मुजफ्फरनगर में संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की किसान पंचायत अब अनिश्चितकालीन धरने में बदल गई है। भारतीय किसान यूनियन (BKU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि युवाओं और किसानों की आवाज को दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है।
मुजफ्फरनगर में किसान पंचायत बनी अनिश्चितकालीन धरना
संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर मुजफ्फरनगर जिला कलेक्ट्रेट में आयोजित किसान पंचायत को अब अनिश्चितकालीन धरने का रूप दे दिया गया है। धरने का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत कर रहे हैं। बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और संगठन से जुड़े कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पहुंचे और विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि सरकार से लंबे समय से जुड़े कई मुद्दे अब भी लंबित हैं, इसलिए आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर साधा निशाना
धरने को संबोधित करते हुए राकेश टिकैत ने दिल्ली में छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो छात्र अपने अधिकारों और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे थे, उनके साथ जिस तरह का व्यवहार हुआ, उससे युवाओं में नाराजगी बढ़ी है। टिकैत ने कहा कि यह घटनाएं केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि गांव-गांव तक चर्चा का विषय बनेंगी। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी है।
किसानों के मुद्दों को लेकर भी सरकार को घेरा
राकेश टिकैत ने कहा कि किसान आंदोलन केवल एक मुद्दे तक सीमित नहीं है। उन्होंने कृषि नीति, बिजली संशोधन विधेयक, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, सर्किल रेट और कृषि आयात जैसे विषयों को किसानों के लिए गंभीर चिंता बताया। उनके अनुसार यदि विदेशी कृषि उत्पादों का आयात बढ़ता है तो इसका सीधा असर भारतीय किसानों और कृषि अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। उन्होंने मांग की कि सरकार किसानों से जुड़े लंबित वादों को जल्द पूरा करे।
जौहर यूनिवर्सिटी पर भी रखी अपनी राय
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े सवाल पर टिकैत ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं माना जा सकता। उनका कहना था कि विश्वविद्यालय शिक्षा और शोध के केंद्र होते हैं तथा किसी भी संस्थान से जुड़े मामलों का समाधान कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा संस्थानों को संरक्षित रखना समाज और देश दोनों के हित में है।
जरूरत पड़ी तो होगा बड़ा आंदोलन
किसान नेता ने कहा कि यदि किसानों और युवाओं की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पहले भी किसानों ने लंबे आंदोलन के बाद अपनी मांगों को मनवाया था और इस बार भी किसान संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। फिलहाल मुजफ्फरनगर में संयुक्त किसान मोर्चा का धरना जारी रहेगा और आगे की रणनीति संगठन की बैठकों में तय की जाएगी।