राजस्थान का ‘रीयल लाइफ सिंघम’: IPS परिस देशमुख की कहानी, गोलियां खाईं… दंगों में उतरे… अब BSF में मिली नई जिम्मेदारी
राजस्थान पुलिस के चर्चित और तेजतर्रार अफसर IPS परिस देशमुख अब नई जिम्मेदारी के साथ सीमा सुरक्षा बल यानी BSF में डीआईजी पद पर तैनात किए गए हैं। करीब 16 साल तक राजस्थान में कानून-व्यवस्था संभालने वाले इस अधिकारी ने अपनी बहादुरी, सख्ती और संवेदनशील कार्यशैली से अलग पहचान बनाई। अपराधियों के खिलाफ एनकाउंटर से लेकर दंगों में फंसे पुलिसकर्मियों को बचाने और शहीद परिवारों के साथ खड़े रहने तक, परिस देशमुख की कहानी किसी फिल्मी किरदार से कम नहीं मानी जाती।
16 साल राजस्थान पुलिस में सेवा, अब BSF में नई पारी
21 मई 2026 को जारी आदेश के बाद IPS परिस देशमुख को राजस्थान पुलिस से रिलीव कर सीमा सुरक्षा बल में डीआईजी पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। लंबे समय तक राजस्थान के कई संवेदनशील जिलों में सेवाएं देने के बाद अब वे देश की सीमाओं की सुरक्षा संभालेंगे। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और विशेष अभियानों में उनके अनुभव को देखते हुए यह जिम्मेदारी बेहद अहम मानी जा रही है। पुलिस महकमे में उनकी पहचान एक ऐसे अधिकारी की रही है, जो कठिन हालात में भी मैदान छोड़ने के बजाय खुद मोर्चा संभालते हैं।
इंजीनियरिंग से IPS तक का सफर
महाराष्ट्र के गोंदिया में जन्मे परिस देशमुख पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे। उन्होंने महाराष्ट्र इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। करियर की शुरुआत सॉफ्टवेयर ट्रेनर के तौर पर हुई, जहां वे NDA कैडेट्स को ट्रेनिंग देते थे। इसी दौरान उनके भीतर वर्दी पहनकर देश सेवा करने का जज्बा मजबूत हुआ। उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की और साल 2010 में भारतीय पुलिस सेवा में चयनित होकर IPS अधिकारी बने। इसके बाद उन्हें राजस्थान कैडर मिला और यहीं से उनकी पुलिसिंग यात्रा शुरू हुई।
भिवाड़ी में पहली पोस्टिंग और मेवाती गैंग से मुठभेड़
IPS बनने के बाद परिस देशमुख की पहली अहम पोस्टिंग अलवर जिले के भिवाड़ी क्षेत्र में हुई। उस समय मेवाती गैंग हाईवे लूट और वाहन चोरी की घटनाओं से आतंक फैला रहा था। साल 2013 में सूचना मिलने पर परिस देशमुख अपनी टीम के साथ बदमाशों को पकड़ने पहुंचे। मुगास्का गांव के पास पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। गोली के छर्रे परिस देशमुख के चेहरे और शरीर में लगे, लेकिन उन्होंने ऑपरेशन जारी रखा। पुलिस ने दो बड़े वाहन चोरों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने दर्जनों वारदातें कबूल कीं।
आनंदपाल एनकाउंटर के बाद दंगों में संभाला मोर्चा
साल 2017 में कुख्यात गैंगस्टर आनंदपाल के एनकाउंटर के बाद नागौर में भारी बवाल भड़क गया था। हजारों लोगों की भीड़ सड़कों पर उतर आई थी और पुलिस पर पथराव व आगजनी की घटनाएं हो रही थीं। उस दौरान GRP थाने में पुलिसकर्मी फंस गए थे। स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी, लेकिन तत्कालीन एसपी परिस देशमुख खुद मौके पर पहुंचे और भीड़ के बीच उतरकर अपने साथियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस दौरान वे घायल भी हुए, लेकिन उनकी त्वरित कार्रवाई से बड़ा नुकसान टल गया। इस घटना ने उन्हें एक बहादुर और फ्रंटलाइन अधिकारी के रूप में पहचान दिलाई।
शहीद कांस्टेबल के परिवार के लिए निभाया भाई का फर्ज
परिस देशमुख सिर्फ सख्त पुलिस अधिकारी ही नहीं, बल्कि संवेदनशील इंसान के तौर पर भी जाने जाते हैं। नागौर हिंसा के दौरान शहीद हुए कांस्टेबल खुमाराम के परिवार के साथ उन्होंने लगातार संपर्क बनाए रखा। साल 2023 में जब शहीद की बहन की शादी हुई, तो परिस देशमुख खुद ‘भाई’ बनकर मायरा लेकर पहुंचे। उन्होंने शादी की रस्मों में हिस्सा लिया और परिवार का पूरा साथ निभाया। यह तस्वीर और घटना पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बनी और लोगों ने उनके मानवीय व्यवहार की सराहना की।
शिक्षा माफिया पर बड़ी कार्रवाई से देशभर में चर्चा
जयपुर में SOG में तैनाती के दौरान परिस देशमुख ने शिक्षा माफिया और फर्जी डिग्री रैकेट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। उन्होंने OPJS यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित फर्जी डिग्री नेटवर्क का खुलासा किया और कई आरोपियों को गिरफ्तार कराया। इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थीं। उनकी टीम ने दस्तावेजों की जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर बड़े नेटवर्क को उजागर किया। इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और कानून के सख्त पालन की दिशा में अहम कदम माना गया।
बहादुरी और सेवा के लिए मिला सम्मान
राजस्थान पुलिस में उत्कृष्ट सेवाओं और साहसिक कार्यों के लिए परिस देशमुख को साल 2024 में ‘पुलिस विशेष कर्तव्य पदक’ से सम्मानित किया गया। उन्होंने अपने करियर में कई संवेदनशील जिलों में जिम्मेदारी संभाली और अपराध नियंत्रण के साथ-साथ जनविश्वास मजबूत करने का काम किया। उनकी कार्यशैली में सख्ती और मानवीय संवेदनशीलता दोनों का संतुलन देखने को मिला। यही वजह रही कि वे पुलिस महकमे के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी लोकप्रिय अधिकारी बने रहे।
अब देश की सीमाओं पर दिखेगा ‘सिंघम’ अंदाज़
राजस्थान पुलिस में अपनी अलग पहचान बनाने के बाद अब परिस देशमुख BSF में नई भूमिका निभाएंगे। सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में उनका अनुभव अहम साबित हो सकता है। पुलिसिंग से लेकर स्पेशल ऑपरेशन तक के अनुभव के कारण उनसे बड़ी उम्मीदें की जा रही हैं। माना जा रहा है कि जिस तरह उन्होंने राजस्थान में अपराध और अव्यवस्था के खिलाफ सख्त रुख अपनाया, उसी तरह अब सीमा सुरक्षा में भी उनकी कार्यशैली देखने को मिलेगी।