मां की डांट से नाराज बच्ची ने रच दी ‘किडनैपिंग’ की कहानी, भीलवाड़ा पुलिस भी रह गई हैरान
राजस्थान के भीलवाड़ा में एक 11 वर्षीय बच्ची ने मोबाइल पर देखी फिल्मों और सोशल मीडिया रिल्स से प्रेरित होकर अपने ही अपहरण की झूठी कहानी गढ़ दी। बच्ची के दावों के बाद पुलिस अलर्ट मोड पर आ गई और पूरे मामले की जांच शुरू हुई, लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो हर कोई चौंक गया। दरअसल, मां की डांट से नाराज होकर बच्ची घर छोड़कर निकल गई थी और रास्ता भटकने के बाद उसने खुद को बचाने के लिए अपहरण की मनगढ़ंत कहानी बना डाली।
सड़क पर मिली बच्ची ने सुनाई अपहरण की कहानी
भीलवाड़ा के गांधी नगर थाना पुलिस को सूचना मिली कि द्वारिका कॉलोनी में एक बच्ची संदिग्ध हालत में खड़ी है और वह खुद के अपहरण की बात कह रही है। मौके पर पहुंची पुलिस को बच्ची ने बताया कि कुछ लोग उसके घर आए, उसे नशीला लड्डू खिलाया और फिर ट्रक में डालकर ले जाने लगे। बच्ची ने दावा किया कि ट्रक में दो अन्य बच्चियां भी थीं और वह मौका देखकर किसी तरह वहां से भाग निकली। बच्ची की कहानी सुनकर पुलिस ने तुरंत मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू कर दी।
पुलिस को कहानी पर हुआ शक
गांधी नगर थाना प्रभारी पुष्पा कासोटियां को बच्ची की बातों में कई विरोधाभास नजर आए। पुलिस ने तुरंत आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और स्थानीय लोगों से पूछताछ शुरू की। जांच के दौरान बच्ची की कहानी में कोई ठोस सबूत नहीं मिला। इसके बाद पुलिस बच्ची को लेकर उसके घर पहुंची, जहां पूछताछ में पूरा मामला साफ हो गया। पुलिस को पता चला कि बच्ची वास्तव में घर से नाराज होकर निकली थी और अपहरण जैसी कोई घटना हुई ही नहीं थी।
मां की डांट बनी झूठी कहानी की वजह
पूछताछ में सामने आया कि पड़ोस की एक महिला ने बच्ची को 10 रुपये की चाय पत्ती लाने भेजा था, लेकिन वह गलती से 90 रुपये वाला पैकेट खरीद लाई। इस बात पर उसकी मां ने उसे डांट दिया। मां के काम पर जाने के बाद बच्ची गुस्से में घर से निकल गई। कुछ देर बाद वह रास्ता भटक गई और डर गई कि घर लौटने पर फिर डांट पड़ेगी। इसी डर के कारण उसने अपने अपहरण की काल्पनिक कहानी बना ली ताकि खुद को बचा सके।
मोबाइल और रिल्स से मिला आइडिया
बच्ची ने पुलिस को बताया कि उसने मोबाइल पर ऐसे वीडियो और टीवी सीरियल देखे थे, जिनमें घर से भागने या मुसीबत से बचने के लिए झूठी कहानियां बनाई जाती हैं। उसी से प्रेरित होकर उसने अपहरण की कहानी गढ़ दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला बच्चों पर सोशल मीडिया और मोबाइल कंटेंट के बढ़ते प्रभाव को भी दिखाता है। छोटी उम्र में बच्चे फिल्मों और रिल्स की चीजों को वास्तविक जीवन में अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, जो कई बार गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
पुलिस ने बच्ची और परिवार को दी समझाइश
मामला सामने आने के बाद पुलिस ने बच्ची और उसके परिवार को समझाइश दी। थाना प्रभारी पुष्पा कासोटियां ने कहा कि झूठी कहानियां न सिर्फ पुलिस संसाधनों की बर्बादी करती हैं, बल्कि किसी बड़ी अनहोनी का कारण भी बन सकती हैं। पुलिस ने बच्ची को समझाया कि भविष्य में इस तरह की हरकत खतरनाक साबित हो सकती है। बच्ची ने भी अपनी गलती स्वीकार करते हुए दोबारा ऐसा न करने का भरोसा दिलाया।
बच्चों पर डिजिटल कंटेंट के असर ने बढ़ाई चिंता
यह घटना सिर्फ एक झूठी कहानी का मामला नहीं, बल्कि बच्चों पर बढ़ते डिजिटल प्रभाव की चेतावनी भी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोबाइल, वेब सीरीज और सोशल मीडिया कंटेंट बच्चों के व्यवहार को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने और उनसे लगातार संवाद बनाए रखने की जरूरत है। भीलवाड़ा की यह घटना बताती है कि छोटी उम्र में देखी गई चीजें किस तरह बच्चों के फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं।