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राजस्थान में 8 साल में 15.9 गुना बढ़ा मशरूम उत्पादन, युवाओं के लिए बना कमाई का नया जरिया

राजस्थान में मशरूम की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कम जगह में उत्पादन, बाजार में बढ़ती मांग और बेहतर कमाई की संभावनाओं ने किसानों और युवाओं का रुझान इस ओर बढ़ाया है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017-18 से 2023-24 के बीच प्रदेश में मशरूम उत्पादन 1.30 हजार टन से बढ़कर 20.69 हजार टन हो गया। इस तरह उत्पादन में करीब 15.9 गुना वृद्धि दर्ज की गई और राजस्थान देश के प्रमुख मशरूम उत्पादक राज्यों में नौवें स्थान पर पहुंच गया। हालांकि, कृषि का दर्जा, सब्सिडी, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच जैसी चुनौतियां अब भी बनी हुई हैं।

राजस्थान में मशरूम उत्पादन ने पकड़ी रफ्तार

राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों के दौरान मशरूम की खेती का दायरा बढ़ा है। पहले जहां इसे सीमित स्तर पर उगाया जाता था, वहीं अब कई जिलों में किसान और नवाचारधर्मी युवा इसे वैकल्पिक व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं।उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2017-18 में प्रदेश में मशरूम का उत्पादन करीब 1.30 हजार टन था। वर्ष 2023-24 तक यह बढ़कर 20.69 हजार टन हो गया। इस बढ़ोतरी के साथ राजस्थान देश में मशरूम उत्पादन के मामले में 13वें स्थान से नौवें स्थान पर पहुंच गया।कम जमीन में खेती करने की सुविधा, नियंत्रित वातावरण में उत्पादन और बाजार में बढ़ती मांग इस विस्तार की प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं।

देश में भी तेजी से बढ़ रहा मशरूम उत्पादन

मशरूम उत्पादन में बढ़ोतरी केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में वर्ष 2019-20 के दौरान करीब 2.11 लाख टन मशरूम का उत्पादन हुआ था। वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर लगभग 3.99 लाख टन हो गया।वर्ष 2025-26 के लिए उत्पादन करीब 4.27 लाख टन रहने का अनुमान बताया गया है। बिहार, ओडिशा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित कई राज्यों में मशरूम उत्पादन का विस्तार हुआ है।किसानों के लिए यह पारंपरिक फसलों के साथ अतिरिक्त आय का विकल्प बन रहा है। खासकर ऐसे युवा किसान, जो कम जमीन में आधुनिक तकनीक से काम शुरू करना चाहते हैं, इस क्षेत्र में संभावनाएं तलाश रहे हैं।

कम जगह में खेती, कमाई की बेहतर संभावना

मशरूम की खेती की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसे बड़े खेत की जरूरत के बिना भी शुरू किया जा सकता है। उपयुक्त कमरों या नियंत्रित वातावरण में इसकी कई किस्में उगाई जा सकती हैं।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मशरूम की सामान्य किस्मों की उत्पादन लागत करीब 70 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो सकती है। वहीं, थोक बाजार में लगभग 200 रुपये और खुदरा बाजार में करीब 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक कीमत मिलने की बात बताई गई है।हालांकि, वास्तविक लागत और मुनाफा मशरूम की किस्म, उत्पादन क्षमता, तापमान नियंत्रण, बिजली, श्रम, पैकिंग, परिवहन और स्थानीय बाजार की कीमतों पर निर्भर करता है। इसलिए खेती शुरू करने से पहले बाजार और लागत का आकलन करना जरूरी है।

राजस्थान की जलवायु के अनुकूल मशरूम की किस्में

प्रदेश में मुख्य रूप से बटन, ऑयस्टर, मिल्की और पैडी स्ट्रॉ मशरूम का उत्पादन किया जा रहा है। अलग-अलग किस्मों के लिए तापमान और वातावरण की जरूरत भी अलग होती है।मिल्की मशरूम गर्म जलवायु के अनुकूल माना जाता है। इसे सामान्यतः 28 से 35 डिग्री सेल्सियस के तापमान में उगाया जा सकता है। वहीं, बटन मशरूम के उत्पादन के लिए लगभग 16 से 18 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है।इसी कारण बटन मशरूम की खेती करने वाले किसानों को कई बार तापमान नियंत्रित करने वाले कमरों और अतिरिक्त तकनीकी सुविधाओं की जरूरत पड़ती है। सही किस्म का चुनाव और वैज्ञानिक तरीके से उत्पादन करना सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।

जयपुर, जोधपुर और उदयपुर में बढ़ रही मांग

मशरूम की मांग रेस्तरां, होटल और खाद्य व्यवसायों में बढ़ रही है। जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जैसे पर्यटन शहरों में इसका इस्तेमाल विभिन्न व्यंजनों में किया जाता है। इसके अलावा, खाद्य प्रसंस्करण और कुछ विशेष औद्योगिक उपयोगों के लिए भी मशरूम की अलग-अलग किस्मों की मांग रहती है।बढ़ते बाजार से किसानों को उत्पादन बेचने के नए अवसर मिल सकते हैं। लेकिन बाजार तक नियमित पहुंच, उचित भंडारण, पैकिंग और समय पर आपूर्ति भी जरूरी है।मशरूम जल्दी खराब होने वाला उत्पाद हो सकता है। इसलिए किसानों को उत्पादन के साथ विपणन और परिवहन की व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए।

कृषि का दर्जा और सब्सिडी की कमी बड़ी चुनौती

राजस्थान में मशरूम उत्पादकों के सामने कई चुनौतियां भी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे कृषि के बजाय उद्योग की श्रेणी में रखे जाने से कुछ सुविधाएं हासिल करने में परेशानी होती है। बिजली कनेक्शन और अन्य व्यवस्थाओं में कृषि क्षेत्र को मिलने वाली रियायतें सभी उत्पादकों को उपलब्ध नहीं हो पातीं।इसके अलावा, सरकारी सब्सिडी की कमी, स्थानीय बाजारों का सीमित दायरा और तकनीकी प्रशिक्षण की जरूरत भी प्रमुख समस्याएं हैं। प्रदेश में मशरूम के गुणवत्तापूर्ण बीज की पर्याप्त उपलब्धता बढ़ाना भी जरूरी बताया जा रहा है।यदि किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार से जोड़ने की बेहतर व्यवस्था मिले, तो इस क्षेत्र में नए उद्यम विकसित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण और सरकारी सहायता पर दिया जोर

मशरूम अनुसंधान से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी खेती में युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता की संभावनाएं हैं। डॉ. मोटाराम शर्मा के अनुसार, कम जगह में उत्पादन और बाजार की मांग के कारण मशरूम की खेती की ओर युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। उन्होंने बीज की उपलब्धता और सुविधाओं से जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान दिलाया।प्रो. एनएल मीणा के अनुसार, मशरूम की कुछ किस्मों में पोषण संबंधी गुण होते हैं और विशेष किस्मों की मांग खाद्य तथा औषधीय अनुसंधान के क्षेत्रों में भी रहती है। उन्होंने राजस्थान में उत्पादकों को प्रोत्साहन देने और जनजातीय क्षेत्रों में मशरूम खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताई।विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशिक्षण केंद्रों का विस्तार, गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता और सरकारी सहायता इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

सीकर से उदयपुर तक कई जिलों में हो रहा उत्पादन

राजस्थान में मशरूम उत्पादन का विस्तार कई जिलों में देखा जा रहा है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में सीकर, झुंझुनूं, चूरू, जयपुर, दौसा, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, नागौर, पाली, जालोर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर शामिल बताए गए हैं।इन जिलों में स्थानीय परिस्थितियों और बाजार की मांग के अनुसार मशरूम की अलग-अलग किस्मों का उत्पादन किया जा रहा है। युवाओं के लिए यह खेती पारंपरिक कृषि के साथ एक अतिरिक्त व्यवसाय का विकल्प बन सकती है।

देश के प्रमुख मशरूम उत्पादक राज्यों में राजस्थान

मशरूम अनुसंधान निदेशालय, सोलन के हवाले से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में प्रमुख राज्यों का उत्पादन इस प्रकार बताया गया है।

क्रमांकराज्यउत्पादन (हजार टन)
1बिहार39.25
2ओडिशा35.40
3महाराष्ट्र32.28
4उत्तर प्रदेश27.70
5उत्तराखंड27.39
6छत्तीसगढ़23.27
7हरियाणा22.65
8हिमाचल प्रदेश20.88
9राजस्थान20.69
10पंजाब19.82

इन आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान देश के शीर्ष दस मशरूम उत्पादक राज्यों में शामिल है। उत्पादन में तेज वृद्धि इस क्षेत्र में बढ़ती दिलचस्पी को दर्शाती है। हालांकि, आगे विकास के लिए बाजार, प्रशिक्षण, गुणवत्तापूर्ण बीज और सरकारी सहायता तक पहुंच मजबूत करना जरूरी होगा।

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Stv News Rajasthan

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