फलोदी बोरवेल हादसा: 39 घंटे बाद बाहर निकाला गया 9 साल के भोमाराम का शव
राजस्थान के फलोदी जिले के लोहावट क्षेत्र के नौसर गांव में बोरवेल में गिरे 9 वर्षीय भोमाराम को बचाया नहीं जा सका। करीब 39 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शनिवार सुबह 3:25 बजे बच्चे का शव बाहर निकाला गया। हादसे के बाद से प्रशासन, पुलिस और बचाव दल उसे सुरक्षित निकालने में जुटे थे। लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद मासूम की जान नहीं बच सकी। घटना के बाद परिवार में शोक है और गांव में मातम का माहौल है।
39 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, फिर भी नहीं बची जान
नौसर गांव में बोरवेल में बच्चे के गिरने की सूचना मिलने के बाद बचाव अभियान शुरू किया गया था। रेस्क्यू टीम लगातार बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने का प्रयास कर रही थी। अभियान के दौरान कई तरह की तकनीकी चुनौतियां सामने आईं।करीब 39 घंटे की मशक्कत के बाद शनिवार सुबह 3:25 बजे भोमाराम को बोरवेल से बाहर निकाला गया। हालांकि, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। बच्चे को बचाने की उम्मीद में घटनास्थल पर जुटे परिजनों और ग्रामीणों को इस खबर से गहरा सदमा लगा।
रात 9 बजे पहुंची NDRF की टीम
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान शुक्रवार रात करीब 9 बजे अजमेर से राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीम घटनास्थल पर पहुंची। इसके बाद बचाव अभियान को आगे बढ़ाया गया। मौके पर राजस्थान सशस्त्र बल (RAC) के जवान भी तैनात किए गए थे।सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए 50 से अधिक पुलिसकर्मी मौजूद रहे। आसपास के क्षेत्र को घेरकर आवाजाही नियंत्रित की गई, ताकि बचाव कार्य में बाधा न आए।प्रशासनिक अधिकारी मौके पर रहकर अभियान की निगरानी कर रहे थे। हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा था कि बच्चे को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।
600 फीट से अधिक गहराई में फंसा था मासूम
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बोरवेल की गहराई 1,050 फीट से अधिक थी। भोमाराम इसके भीतर 600 फीट से ज्यादा नीचे फंसा हुआ था। इतनी गहराई में बच्चे तक पहुंचना बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बना रहा।रेस्क्यू टीम कैमरे की मदद से बोरवेल के भीतर बच्चे की स्थिति पर नजर रखने का प्रयास कर रही थी। लेकिन उसके ऊपर पत्थर आ जाने से कैमरे के जरिए उसकी स्थिति का आकलन करना मुश्किल हो गया। बोरवेल के भीतर नमी और पानी की मौजूदगी ने भी बचाव कार्य को जटिल बनाया।बच्चे को निकालने के लिए देसी तकनीक से बोरवेल रेस्क्यू करने में अनुभव रखने वाले मादाराम को भी बुलाया गया था। इसके अलावा प्रशासन अन्य तकनीकी विकल्पों पर भी विचार कर रहा था।
बोरवेल की मरम्मत के दौरान हुआ हादसा
पुलिस के अनुसार, पांचाराम भील के खेत में बोरवेल की मशीन खराब हो गई थी। इसके चलते पंप को बाहर निकालकर उसकी मरम्मत की जा रही थी। इसी दौरान पास में खेल रहा पांचाराम का 9 वर्षीय बेटा भोमाराम खुले बोरवेल में गिर गया।बच्चे के गिरने की खबर मिलते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद प्रशासन और बचाव दल को सूचना दी गई। टीमों ने मौके पर पहुंचकर बच्चे को बाहर निकालने का अभियान शुरू किया।हादसे की परिस्थितियों और खुले बोरवेल की स्थिति को लेकर आगे की जानकारी संबंधित जांच के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
भोमाराम अपने माता-पिता का इकलौता बेटा बताया गया है। परिवार को उम्मीद थी कि बचाव दल उसे सुरक्षित बाहर निकाल लेगा। करीब 39 घंटे तक चले अभियान के दौरान परिजन उसकी सलामती की आस लगाए रहे।लेकिन शनिवार सुबह बच्चे का शव बाहर निकाले जाने के बाद परिवार की उम्मीदें टूट गईं। मासूम की मौत से नौसर गांव में शोक का माहौल है।शव को बाहर निकालने के बाद पुलिस की निगरानी में आगे की प्रक्रिया पूरी की गई। परिजनों को दिखाने के बाद शव एंबुलेंस से लोहावट अस्पताल भेजा गया।
खुले बोरवेल से होने वाले हादसों पर फिर उठे सवाल
फलोदी की यह घटना खुले और असुरक्षित बोरवेल से होने वाले हादसों की गंभीरता को फिर सामने लाती है। खेतों या अन्य स्थानों पर बोरवेल का काम पूरा होने या मरम्मत के दौरान उसे सुरक्षित तरीके से ढकना जरूरी है।खुले बोरवेल बच्चों और आसपास के लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं। ऐसे स्थानों की घेराबंदी और सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि इस तरह की दुखद घटनाओं से बचा जा सके।भोमाराम को बचाने के लिए चला लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन आखिरकार दुखद परिणाम के साथ समाप्त हुआ। अब परिवार और गांव के लोग इस अपूरणीय क्षति से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।