राजस्थान चतुर्थ श्रेणी भर्ती में MBC कैटेगरी पर सवाल, दो नामों से मचा बवाल
राजस्थान परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग की चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सीधी भर्ती-2024 से जुड़ी एक सूची सामने आने के बाद MBC आरक्षण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 12 अगस्त 2026 को जारी कार्यालय आदेश में MBC श्रेणी के तहत दो ऐसे नाम दर्ज होने पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिनके सरनेम को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तियां सामने आई हैं। मामले ने आरक्षण व्यवस्था, दस्तावेज सत्यापन और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि, केवल सरनेम के आधार पर किसी व्यक्ति की जाति या आरक्षण पात्रता तय नहीं की जा सकती। अब विभाग की आधिकारिक स्थिति का इंतजार है।
चतुर्थ श्रेणी भर्ती की सूची से शुरू हुआ विवाद
राजस्थान परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सीधी भर्ती-2024 के चयनित अभ्यर्थियों के पदस्थापन और कार्यालय आवंटन से संबंधित आदेश जारी किया। इसी आदेश में MBC श्रेणी के अंतर्गत दर्ज कुछ नामों को लेकर सवाल उठने लगे। सूची सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अभ्यर्थियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से मामले की जांच की मांग की जा रही है। विवाद का केंद्र यह है कि चयन प्रक्रिया में आरक्षण की श्रेणी किस आधार पर तय की गई और क्या सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का नियमानुसार सत्यापन हुआ था। विभाग की स्पष्ट जानकारी से ही स्थिति पूरी तरह सामने आ सकेगी।
दो अभ्यर्थियों के नाम को लेकर उठे सवाल
वायरल हो रहे कार्यालय आदेश में रविकान्त सैनी का नाम मेरिट क्रमांक 1158 पर MBC श्रेणी में दर्ज बताया जा रहा है। उनका पदस्थापन मुख्यालय में किया गया है। वहीं विमल कुमार शर्मा का नाम मेरिट क्रमांक 1376 पर MBC श्रेणी में दर्ज होने की बात सामने आई है और उन्हें RTO भरतपुर इन्फोर्समेंट में पदस्थापन दिया गया है। इन्हीं प्रविष्टियों को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी उम्मीदवार की आरक्षण पात्रता सिर्फ नाम या सरनेम देखकर तय नहीं होती। इसके लिए आधिकारिक जाति प्रमाण पत्र और लागू नियमों की जांच जरूरी है।
MBC आरक्षण को लेकर क्या है विवाद?
राजस्थान में MBC यानी अति पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण की व्यवस्था लागू है। इसी श्रेणी में पात्र अभ्यर्थियों को निर्धारित नियमों के अनुसार सरकारी भर्ती में लाभ मिलता है। मौजूदा विवाद में सवाल यह है कि संबंधित अभ्यर्थियों को MBC श्रेणी में किस आधार पर शामिल किया गया। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सरनेम अपने आप किसी व्यक्ति की आरक्षण श्रेणी का प्रमाण नहीं होता। किसी अभ्यर्थी की वास्तविक श्रेणी उसके वैध दस्तावेजों और सरकारी नियमों के आधार पर तय होती है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष विभागीय रिकॉर्ड और आधिकारिक जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
सोशल मीडिया पर वायरल सूची से बढ़ी चर्चा
कार्यालय आदेश की कॉपी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद भर्ती प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कुछ अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि सूची में श्रेणी निर्धारण से जुड़ी कोई वास्तविक गलती हुई है, तो उसे तुरंत ठीक किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि आरक्षण के तहत मिलने वाले अवसर पात्र अभ्यर्थियों के अधिकार से जुड़े होते हैं। दूसरी ओर, बिना आधिकारिक जांच के किसी उम्मीदवार को गलत श्रेणी का लाभ लेने वाला बताना भी उचित नहीं होगा। इसलिए मामले में दस्तावेजों की जांच और विभाग की आधिकारिक सफाई महत्वपूर्ण हो गई है।
विजय बैंसला ने उठाई जांच और कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर गुर्जर नेता विजय बैंसला ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने सरकार और संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। बैंसला का कहना है कि यदि दस्तावेज सत्यापन के बाद जारी अंतिम सूची में MBC श्रेणी को लेकर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने पात्र अभ्यर्थियों के अधिकारों और आरक्षण व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया है। उनका रुख सामने आने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है।
अब विभाग की सफाई पर टिकी नजर
इस विवाद के बीच सबसे अहम सवाल परिवहन विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया का है। विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि सूची में दर्ज अभ्यर्थियों की MBC पात्रता किन दस्तावेजों के आधार पर निर्धारित की गई। साथ ही यह भी सामने आना जरूरी है कि नियुक्ति से पहले जाति प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया। यदि कोई लिपिकीय या प्रशासनिक त्रुटि हुई है तो उसे संशोधित किया जा सकता है, जबकि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।
आरक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता सबसे बड़ा मुद्दा
चतुर्थ श्रेणी भर्ती से जुड़े इस विवाद ने एक बार फिर सरकारी भर्तियों में आरक्षण प्रक्रिया और दस्तावेज सत्यापन की पारदर्शिता को महत्वपूर्ण मुद्दा बना दिया है। हजारों अभ्यर्थी सरकारी नौकरियों के लिए प्रतियोगिता में शामिल होते हैं और आरक्षण श्रेणी उनके चयन की प्रक्रिया को प्रभावित करती है। इसलिए श्रेणी निर्धारण में किसी भी प्रकार की गलती का असर सीधे उम्मीदवारों पर पड़ सकता है। हालांकि इस मामले में अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी अभ्यर्थी की पात्रता पर अंतिम टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी। आधिकारिक जांच और विभागीय रिकॉर्ड ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट करेंगे।