‘अमित शाह सदन में आकर सफाई दें’, राहुल गांधी ने लोकसभा के बाहर दोहराए आरोप; बयान पर सियासी संग्राम तेज
लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लगाए गए आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। सदन में तीखी नोकझोंक के बाद राहुल गांधी ने संसद परिसर के बाहर भी अपने आरोप दोहराते हुए कहा कि यदि गृह मंत्री ने छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का आदेश नहीं दिया था, तो उन्हें सदन में आकर इस पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। वहीं, सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए राहुल गांधी से माफी की मांग की।
लोकसभा के बाहर भी राहुल गांधी ने दोहराया अपना पक्ष
संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में मौजूद नहीं थे और उन्हें इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई में गृह मंत्री की कोई भूमिका नहीं थी, तो उन्हें स्वयं संसद में आकर यह स्पष्ट करना चाहिए। राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने केवल जवाबदेही का सवाल उठाया है और सरकार को इस पर पारदर्शी तरीके से अपनी बात रखनी चाहिए।
सदन में कार्रवाई को लेकर उठाए सवाल
लोकसभा में चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों के विरोध प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पूरे घटनाक्रम में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि गृह मंत्री को कार्रवाई की जानकारी थी तो सरकार को उसकी जवाबदेही तय करनी चाहिए और यदि जानकारी नहीं थी, तो यह भी गंभीर प्रशासनिक प्रश्न है। उनके इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई और माहौल काफी गरमा गया।
सरकार ने आरोपों को बताया निराधार, माफी की उठी मांग
राहुल गांधी के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति पर बिना तथ्य और प्रमाण के गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी से पूछा कि उनके आरोपों का आधार क्या है और कहा कि यदि कोई ठोस साक्ष्य नहीं है तो उन्हें सदन से माफी मांगनी चाहिए। सत्ता पक्ष के कई सांसदों ने भी इस मांग का समर्थन किया।
लोकसभा अध्यक्ष ने तथ्यों के साथ बोलने की दी सलाह
बहस के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि सदन में किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगाते समय तथ्यों और प्रमाणों का ध्यान रखना आवश्यक है। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि संसद की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है और बिना पुष्ट जानकारी के लगाए गए आरोप संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं माने जाते।
मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने
इस पूरे घटनाक्रम के बाद विपक्ष ने छात्रों के आंदोलन और पुलिस कार्रवाई पर सरकार से जवाब मांगा, जबकि सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी के आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार दिया। समाजवादी पार्टी सहित कुछ विपक्षी दलों ने कहा कि यदि गंभीर आरोप लगाए गए हैं तो सरकार को भी पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने कहा कि संसद में आरोप तथ्यों के आधार पर लगाए जाने चाहिए। ऐसे में छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा अब संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।