मतभेदों के बावजूद चीन को चुनौती देने में जुटा QUAD, रेयर अर्थ पर निर्भरता घटाने की तैयारी
भारत और अमेरिका के बीच हाल के महीनों में कुछ मुद्दों पर मतभेद जरूर सामने आए हैं, लेकिन चीन के दुर्लभ खनिजों (रेयर अर्थ मिनरल्स) पर बढ़ते दबदबे ने QUAD देशों को एक साझा लक्ष्य के तहत एकजुट रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक चुनौतियों के बावजूद भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया का यह समूह सप्लाई चेन में चीन की पकड़ कमजोर करने की दिशा में सहयोग जारी रखेगा।
भारत-अमेरिका संबंधों में आई खटास के बीच भी कायम है रणनीतिक साझेदारी
डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा सत्ता में आने के बाद भारत और अमेरिका के संबंधों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। हाल की कुछ घटनाओं ने दोनों देशों के बीच असहजता भी बढ़ाई है। इसके बावजूद रणनीतिक और आर्थिक हितों को देखते हुए दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बनाए रखने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा मतभेद QUAD की दीर्घकालिक योजनाओं को पूरी तरह प्रभावित नहीं करेंगे।
रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर चीन की बढ़ती ताकत बनी चिंता
चीन वर्तमान में कई महत्वपूर्ण खनिजों और उनकी प्रोसेसिंग क्षमता पर मजबूत पकड़ रखता है। गैलियम, जर्मेनियम, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ तत्व आधुनिक तकनीक, रक्षा उपकरण, इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। बीजिंग द्वारा निर्यात नियंत्रण जैसे कदमों ने कई देशों को वैकल्पिक सप्लाई चेन तैयार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
QUAD की नई पहल से कम होगी चीन पर निर्भरता
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया मिलकर खनिज आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। इसी उद्देश्य से QUAD के तहत एक विशेष ‘क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क’ पर जोर दिया जा रहा है। इस पहल का मकसद सदस्य देशों में खनन, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग क्षमताओं को बढ़ावा देना है, ताकि भविष्य में चीन पर अत्यधिक निर्भरता कम की जा सके।
विशेषज्ञ बोले- मतभेदों के बावजूद जारी रहेगा सहयोग
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि कुछ राजनीतिक मतभेदों के बावजूद QUAD देशों के साझा हित कहीं अधिक बड़े हैं। रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, सप्लाई चेन में विविधता लाना और महत्वपूर्ण संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चारों देशों की प्राथमिकता बनी हुई है। इसी कारण QUAD के एजेंडे की गति धीमी पड़ सकती है, लेकिन इसकी दिशा में कोई बड़ा बदलाव आने की संभावना नहीं है।
भारत के लिए भी अहम हैं क्रिटिकल मिनरल्स
भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में दुर्लभ खनिजों की स्थिर उपलब्धता देश की आर्थिक और रणनीतिक जरूरत बन चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि QUAD के जरिए भारत न केवल अपनी आपूर्ति सुरक्षा मजबूत कर सकता है, बल्कि भविष्य में वैश्विक वैकल्पिक सप्लाई नेटवर्क का अहम हिस्सा भी बन सकता है।