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कतर हादसे में 12 भारतीयों की मौत, पार्थिव शरीर वतन लाने में जुटी भारत सरकार: MEA

कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए भीषण हादसे में 12 भारतीय नागरिकों की मौत हो गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि भारत सरकार मृतकों के पार्थिव शरीरों को स्वदेश लाने और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए स्थानीय प्रशासन के संपर्क में है।

रास लाफान हादसे पर विदेश मंत्रालय ने जताया गहरा दुख

कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी में हुए विस्फोट ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को बताया कि इस दुर्घटना में 12 भारतीय नागरिकों की जान चली गई है। उन्होंने कहा कि हादसे में अन्य देशों के नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। भारत सरकार इस घटना को लेकर लगातार कतर के अधिकारियों के संपर्क में है और हर स्तर पर स्थिति पर नजर रख रही है। सरकार का प्रयास है कि प्रभावित भारतीय परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।

घायलों की स्थिति पर भी रखी जा रही नजर

विदेश मंत्रालय के अनुसार हादसे में विभिन्न देशों के करीब 66 लोग घायल हुए हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इनमें कितने भारतीय नागरिक शामिल हैं। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक सभी घायल सुरक्षित हैं और उनका उपचार जारी है। भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन और अस्पतालों के साथ समन्वय बनाकर स्थिति की निगरानी कर रहा है। सरकार यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि घायल भारतीयों को आवश्यक सहायता और सुविधाएं समय पर मिलती रहें।

पार्थिव शरीरों की पहचान और स्वदेश वापसी की प्रक्रिया शुरू

रणधीर जायसवाल ने बताया कि मृत भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीरों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। इसके लिए भारतीय अधिकारी कतर प्रशासन के साथ लगातार संपर्क में हैं। साथ ही मृतकों के परिवारों से भी संवाद स्थापित किया जा रहा है ताकि आवश्यक औपचारिकताओं को जल्द पूरा किया जा सके। सरकार का उद्देश्य है कि सभी पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक जल्द से जल्द भारत लाए जा सकें और पीड़ित परिवारों को इस कठिन समय में हरसंभव सहयोग प्रदान किया जा सके।

ख्वाजा आसिफ के बयान पर भारत का कड़ा जवाब

इस दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की हालिया टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से लगाए जा रहे आरोप निराधार और मनगढ़ंत हैं। भारत ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि ऐसे बयान पाकिस्तान की आंतरिक नाकामियों और मानवाधिकार उल्लंघनों से ध्यान हटाने की कोशिश हैं। भारत का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को इन मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की स्थिति पर भी उठाए सवाल

रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में लंबे समय से आर्थिक शोषण, प्रशासनिक दमन और नागरिक अधिकारों के हनन की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए पाकिस्तान ने कठोर कदम उठाए हैं, जिनमें इंटरनेट सेवाओं पर रोक, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में बाधा और बल प्रयोग जैसी घटनाएं शामिल हैं। भारत ने उम्मीद जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय मानवाधिकारों से जुड़े इन मुद्दों पर पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराने की दिशा में उचित कदम उठाएगा।

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