लोकसभा में प्रियंका गांधी का सरकार पर हमला, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री से मांगा जवाब
लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग का आदेश किस स्तर से दिया गया और पूरे मामले पर गृह मंत्री से सदन में जवाब देने की मांग की।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सरकार से पूछे तीखे सवाल
संसद में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने कहा कि परीक्षा संबंधी मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार है और उनकी आवाज सुनने के बजाय उनके खिलाफ बल प्रयोग किए जाने के आरोपों पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट गन के इस्तेमाल का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया।
अस्पताल में घायल छात्रों से मुलाकात का किया जिक्र
प्रियंका गांधी ने सदन में बताया कि वह घायल छात्रों से मिलने के लिए अस्पताल गई थीं। उन्होंने कहा कि वहां घायल छात्रों और उनके परिजनों की पीड़ा देखकर कई सवाल खड़े हुए। उनके अनुसार, एक छात्रा की मां ने अपनी बेटी की हालत को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की और न्याय की मांग की। प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्हीं परिवारों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए वह सरकार से जवाब मांग रही हैं।
लोकतंत्र में संवाद जरूरी, सरकार दे स्पष्टीकरण: प्रियंका
कांग्रेस सांसद ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध प्रदर्शन करने वालों की बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े सभी तथ्यों को सदन और देश के सामने रखा जाए। साथ ही उन्होंने आग्रह किया कि यदि किसी स्तर पर आवश्यकता से अधिक बल प्रयोग हुआ है, तो उसकी जवाबदेही भी तय की जानी चाहिए।
पेपर लीक विधेयक पर जारी है विस्तृत चर्चा
लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार बहस जारी है। सरकार का कहना है कि नए प्रावधान परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाएंगे, जबकि विपक्ष का तर्क है कि केवल कानून को सख्त बनाने के बजाय परीक्षा व्यवस्था में व्यापक संस्थागत सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।