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राहुल गांधी के कोटा दौरे पर सियासी संग्राम, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के कोटा दौरे के बाद राजस्थान की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर राहुल गांधी द्वारा छात्रों से संवाद करने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भाजपा जहां कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुए पेपर लीक मामलों को मुद्दा बना रही है, वहीं कांग्रेस वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार को घेर रही है।

राहुल गांधी के दौरे के बाद गरमाई राजनीति

राहुल गांधी ने कोटा में नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों से मुलाकात कर शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और युवाओं की चुनौतियों पर चर्चा की। इसके बाद भाजपा नेताओं ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल उठाए कि कांग्रेस शासनकाल में हुए पेपर लीक मामलों पर उन्होंने कभी आवाज क्यों नहीं उठाई। कोटा से जयपुर तक इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।

दिया कुमारी का सवाल- गहलोत सरकार में क्यों थे खामोश?

उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को राजनीतिक दिखावा बताते हुए कहा कि अशोक गहलोत सरकार के दौरान भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक का रिकॉर्ड बना था, लेकिन उस समय राहुल गांधी ने युवाओं के पक्ष में कोई आवाज नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी तरीके से आयोजित किया जा रहा है और युवाओं के हितों की रक्षा प्राथमिकता है।

राजेंद्र राठौड़ ने गिनाए पेपर लीक के मामले

भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के पांच वर्षों के दौरान 19 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय न तो दोषियों पर प्रभावी कार्रवाई हुई और न ही राहुल गांधी ने कोई सवाल उठाया। राठौड़ ने कहा कि वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल में एक भी पेपर लीक की घटना सामने नहीं आई है।

भाजपा का आरोप- युवाओं के मुद्दों पर राजनीति

राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने राहुल गांधी पर युवाओं के मुद्दों का राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बयान देश में भ्रम और अस्थिरता का माहौल बनाने का प्रयास हैं। भाजपा का दावा है कि वर्तमान सरकार शिक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लगातार कदम उठा रही है।

कांग्रेस का पलटवार, शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राहुल गांधी का बचाव करते हुए कहा कि वे देश के युवाओं की आवाज हैं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। जूली ने कहा कि छात्रों और युवाओं के भविष्य से जुड़े सवालों पर चर्चा करना राजनीति नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।

डोटासरा ने मेडिकल शिक्षा की लागत पर उठाए सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि हर वर्ष लाखों छात्र नीट परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें बेहद सीमित हैं। उन्होंने दावा किया कि निजी मेडिकल कॉलेजों की फीस करोड़ों रुपये तक पहुंच गई है, जिससे सामान्य और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए डॉक्टर बनने का सपना कठिन होता जा रहा है। डोटासरा ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता है ताकि प्रतिभाशाली युवाओं को समान अवसर मिल सकें।

शिक्षा और रोजगार पर बहस बनी राजनीतिक मुद्दा

राहुल गांधी के कोटा दौरे ने राजस्थान में शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और युवाओं के भविष्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने-अपने तर्कों के साथ जनता के बीच इस मुद्दे को उठा रहे हैं। आने वाले समय में यह विवाद प्रदेश की राजनीति और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है।

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