#पॉलिटिक्स #राज्य-शहर

300 से अधिक भूमि आवंटन रद्द होने पर सियासत तेज, गहलोत ने सरकार से मांगा श्वेत पत्र

राजस्थान में पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में सामाजिक संस्थाओं, छात्रावासों और जनकल्याणकारी उद्देश्यों के लिए किए गए 300 से अधिक भूमि आवंटन निरस्त किए जाने के मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य सरकार से इस फैसले का आधार सार्वजनिक करने की मांग करते हुए श्वेत पत्र जारी करने का आग्रह किया है। वहीं, इस मामले को लेकर सरकार की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

गहलोत ने फैसले की पारदर्शिता पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि उनकी सरकार के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा समाजों, संस्थाओं और जनहित के कार्यों के लिए किए गए 300 से अधिक भूमि आवंटनों को वर्तमान सरकार ने निरस्त कर दिया। उनका कहना है कि कई मामलों में संबंधित संस्थाओं ने निर्धारित अमानत राशि भी जमा करा दी थी, इसके बावजूद आवंटन रद्द कर दिए गए। गहलोत ने सरकार से मांग की कि वह स्पष्ट करे कि किन नियमों और आधारों पर यह कार्रवाई की गई।

जनकल्याण और छात्रावास परियोजनाओं का किया जिक्र

गहलोत ने दावा किया कि निरस्त किए गए अधिकांश भूमि आवंटन किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि छात्रावास, सामाजिक संस्थाओं और सार्वजनिक उपयोग की परियोजनाओं के लिए किए गए थे। उनके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों की शिक्षा और सामाजिक विकास से जुड़ी कई योजनाएं इससे प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णयों से संबंधित समाजों और संस्थाओं में असंतोष का माहौल है तथा सरकार को इन मामलों की पुनः समीक्षा करनी चाहिए।

भाजपा कार्यालयों के लिए भूमि आवंटन पर भी उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एक ओर सामाजिक संस्थाओं के लिए किए गए भूमि आवंटन रद्द किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश और जिला कार्यालयों के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रियाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि सरकारी भूमि उपलब्ध है तो जनहित और सामाजिक कार्यों से जुड़ी संस्थाओं को प्राथमिकता क्यों नहीं दी जा रही। उन्होंने सरकार से इस संबंध में पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।

श्वेत पत्र जारी करने और फैसले पर पुनर्विचार की मांग

गहलोत ने राज्य सरकार से मांग की कि वह एक श्वेत पत्र जारी कर यह बताए कि किन-किन संस्थाओं के भूमि आवंटन रद्द किए गए, उनके पीछे क्या कारण रहे और निर्णय किस प्रक्रिया के तहत लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता नहीं है तो प्रभावित संस्थाओं के मामलों की समीक्षा कर उचित निर्णय लिया जाना चाहिए। फिलहाल इस पूरे मुद्दे पर सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।

इसे भी पढ़ें-असम में बाढ़ का कहर जारी, 5.24 लाख लोग प्रभावित, मृतकों की संख्या 68 पहुंची

author avatar
Stv News Rajasthan

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *