प्लेटलेट्स बढ़ना भी हो सकता है खतरनाक, जानिए क्या है Platelet Disorder और इसके संकेत
अक्सर लोग प्लेटलेट्स कम होने को ही गंभीर समस्या मानते हैं, लेकिन शरीर में प्लेटलेट्स का सामान्य से अधिक बढ़ना भी कई स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्लेटलेट्स का असंतुलन खून के थक्के बनने और अन्य जटिलताओं का कारण बन सकता है।
प्लेटलेट्स का संतुलन क्यों है जरूरी?
खून में मौजूद प्लेटलेट्स चोट लगने पर रक्तस्राव रोकने का काम करते हैं। सामान्य तौर पर शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या 1.5 लाख से 4 लाख प्रति माइक्रोलिटर के बीच मानी जाती है। लेकिन जब इनकी संख्या सामान्य सीमा से अधिक हो जाती है, तो खून के गाढ़ा होने और नसों में थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति को प्लेटलेट डिसऑर्डर या थ्रोम्बोसाइटोसिस कहा जाता है, जो दिल और मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती है।
क्या होता है प्लेटलेट डिसऑर्डर?
प्लेटलेट डिसऑर्डर वह स्थिति है, जब शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या या उनका कार्य सामान्य तरीके से काम नहीं करता। कई मामलों में प्लेटलेट्स की अत्यधिक संख्या शरीर के भीतर अनचाहे रक्त के थक्के बना सकती है। वहीं कुछ लोगों में यह समस्या लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी बनी रह सकती है। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच और रक्त परीक्षण के जरिए इसका पता लगाना महत्वपूर्ण माना जाता है।
बोन मैरो की गड़बड़ी भी हो सकती है वजह
प्राइमरी थ्रोम्बोसाइथेमिया नामक स्थिति में बोन मैरो आवश्यकता से अधिक प्लेटलेट्स बनाने लगता है। यह समस्या किसी अन्य बीमारी के कारण नहीं होती, बल्कि कई बार आनुवंशिक बदलाव या बोन मैरो की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी से जुड़ी हो सकती है। ऐसे मामलों में मरीज को लंबे समय तक चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता पड़ सकती है।
दूसरी बीमारियों के कारण भी बढ़ सकते हैं प्लेटलेट्स
सेकेंडरी थ्रोम्बोसाइटोसिस में शरीर की किसी अन्य बीमारी या स्थिति के कारण प्लेटलेट्स का स्तर बढ़ जाता है। संक्रमण, खून की कमी, कुछ प्रकार के कैंसर, सूजन संबंधी रोग या तिल्ली का हट जाना इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। आमतौर पर मूल बीमारी का इलाज होने के बाद प्लेटलेट्स की संख्या भी सामान्य स्तर पर लौट सकती है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
प्लेटलेट डिसऑर्डर के दौरान शरीर में कई तरह के संकेत दिखाई दे सकते हैं। त्वचा पर आसानी से निशान पड़ना, नाक या मसूड़ों से खून आना, महिलाओं में अत्यधिक रक्तस्राव, मल या मूत्र में खून दिखाई देना और लगातार कमजोरी महसूस होना इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं। कुछ मामलों में शरीर के अंदर असामान्य रक्त के थक्के भी बन सकते हैं, जो गंभीर स्थिति का संकेत हो सकते हैं।
कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?
यदि बार-बार ब्लीडिंग, शरीर पर बिना कारण नीले निशान या खून के थक्के बनने जैसी समस्याएं दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। समय पर जांच और सही उपचार से प्लेटलेट्स से जुड़ी जटिलताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।