गिरते बाजार में भी चमके फार्मा शेयर, 2026 में 33% तक रिटर्न; जानिए निवेशकों का भरोसा क्यों बढ़ा
भारतीय शेयर बाजार में साल 2026 के दौरान कई प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे, लेकिन फार्मा सेक्टर ने मजबूती दिखाते हुए निवेशकों को राहत दी है। निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने सकारात्मक रिटर्न दिया है, जबकि कुछ दवा कंपनियों के शेयरों ने 30 फीसदी से ज्यादा की बढ़त दर्ज की है। घरेलू मांग, वैश्विक अनिश्चितता और चीन से सप्लाई चेन शिफ्ट होने की संभावनाओं ने इस सेक्टर को नई ताकत दी है।
गिरते बाजार के बीच फार्मा सेक्टर बना सहारा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक दबाव के कारण भारतीय शेयर बाजार के कई सेक्टर कमजोर रहे हैं। निफ्टी, आईटी, बैंकिंग और ऑटो इंडेक्स में गिरावट देखने को मिली, लेकिन फार्मा सेक्टर ने निवेशकों का भरोसा बनाए रखा। निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने साल 2026 में सकारात्मक प्रदर्शन किया और कई कंपनियों ने दो अंकों में रिटर्न दिया। ग्लैंड फार्मा, वॉकहार्ट, लॉरस लैब्स और अरबिंदो फार्मा जैसे शेयरों ने मजबूत तेजी दिखाई। दवाओं की स्थिर मांग ने कंपनियों की आय को मजबूत बनाए रखा।
घरेलू बाजार की मजबूत मांग बनी सबसे बड़ी ताकत
फार्मा कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा भारतीय बाजार से आता है। स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते खर्च और क्रॉनिक व एक्यूट दोनों प्रकार की दवाओं की लगातार मांग ने इस सेक्टर को स्थिरता दी है। वैश्विक निर्यात आधारित उद्योगों की तुलना में फार्मा कंपनियां बाहरी जोखिमों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित हुई हैं। इसी वजह से बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों ने दवा कंपनियों को सुरक्षित विकल्प के रूप में देखा और उनमें निवेश बढ़ाया।
सुरक्षित निवेश के रूप में बढ़ी फार्मा शेयरों की मांग
मिडिल ईस्ट संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में बाजार का रुझान डिफेंसिव सेक्टरों की ओर बढ़ा है। फार्मा उद्योग पर कमोडिटी कीमतों का असर सीमित होता है, इसलिए इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। यही वजह है कि अनिश्चित माहौल में निवेशकों ने दवा कंपनियों में भरोसा दिखाया और इस सेक्टर में खरीदारी बढ़ी।
चीन से सप्लाई चेन शिफ्ट होने का मिल सकता है फायदा
हालिया वैश्विक घटनाक्रम के बाद कई बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियां चीन पर अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में काम कर रही हैं। यदि वैश्विक सप्लाई चेन का कुछ हिस्सा भारत की ओर शिफ्ट होता है, तो भारतीय कॉन्ट्रैक्ट ड्रग मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को बड़ा लाभ मिल सकता है। इससे देश की फार्मा इंडस्ट्री को दीर्घकालिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
भविष्य में बायोफार्मा सेक्टर से बड़ी उम्मीदें
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उम्र की आबादी, हेल्थकेयर पर बढ़ता खर्च, वैक्सीन, मोटापा उपचार, डिजिटल हेल्थ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकें आने वाले वर्षों में फार्मा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती हैं। अनुमान है कि अगले दशक में भारत का बायोफार्मा उद्योग तेजी से विस्तार करेगा और वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाएगा।