पेट्रोल-डीजल और LPG की कीमतें कब होंगी कम? ट्रंप की नीति, ईरान संकट और कच्चे तेल की चाल से बढ़ी अनिश्चितता
वैश्विक तेल बाजार एक बार फिर अस्थिर दौर से गुजर रहा है। ईरान-अमेरिका तनाव, होर्मुज जलमार्ग की स्थिति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के उतार-चढ़ाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बदलाव देखा जा रहा है। इससे पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में राहत की उम्मीद पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी
हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और तनाव दोनों ही स्थितियों का असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ा है।
कभी शांति वार्ता की खबरों से ब्रेंट क्रूड करीब 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, तो वहीं तनाव बढ़ने की आशंका के बीच यह फिर 80 डॉलर के ऊपर चला गया।
ट्रंप के बयानों से बढ़ी बाजार की अस्थिरता
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता का एक बड़ा कारण अमेरिका की राजनीतिक बयानबाजी भी मानी जा रही है। ईरान को लेकर सख्त और नरम रुख के बीच बदलाव से निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसी अस्थिर संकेतों के कारण तेल बाजार स्थिर दिशा नहीं पकड़ पा रहा है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ता कीमतों पर पड़ता है।
होर्मुज जलमार्ग की भूमिका
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण मार्ग है। इसके जरिए खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और एलपीजी दुनिया भर में भेजा जाता है।
तनाव या बाधा की स्थिति में इस मार्ग से आपूर्ति प्रभावित होती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तुरंत कीमतें बढ़ जाती हैं। भारत की तेल आयात निर्भरता को देखते हुए यह मार्ग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
भारत की ऊर्जा निर्भरता और असर
भारत अपनी घरेलू जरूरतों का लगभग 85–90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है, जिनमें इराक, सऊदी अरब, कुवैत और UAE प्रमुख हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहती हैं, तभी भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत संभव है।
फिलहाल सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अपने पुराने घाटे को संतुलित करने की स्थिति में हैं, जिससे तत्काल राहत की संभावना सीमित बनी हुई है।
एलपीजी और रिफाइंड उत्पादों पर दबाव
केवल कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि एलपीजी और रिफाइंड उत्पादों की सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है।
खाड़ी क्षेत्र की कुछ रिफाइनरियों में उत्पादन प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर डीजल, जेट फ्यूल और एलपीजी की आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।
- एशिया में LPG और नाफ्था की आपूर्ति पर असर
- यूरोप में डीजल और जेट फ्यूल की कमी की आशंका
- अमेरिका में घरेलू पेट्रोल स्टॉक पर दबाव
भारत में कीमतें कब घट सकती हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी तभी संभव है जब:
- कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक स्थिर और कम रहे
- वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था सामान्य हो
- तेल कंपनियों का पिछला घाटा कम हो
तब तक कीमतों में बड़ी राहत की उम्मीद सीमित बनी रहेगी।