भारत से तनाव के बाद पाकिस्तान ने बदली रणनीति, ‘तैमूर’ मिसाइल का समुद्र में सफल परीक्षण
भारत के साथ हालिया सैन्य तनाव के बाद पाकिस्तान अपनी लंबी दूरी की हमलावर क्षमताओं को मजबूत करने में जुट गया है। इसी क्रम में पाकिस्तान नौसेना ने अरब सागर में नई ‘तैमूर’ क्रूज मिसाइल के नौसैनिक संस्करण का परीक्षण किया है। विशेषज्ञ इसे इस्लामाबाद की बदलती सैन्य रणनीति और बहु-क्षेत्रीय (मल्टी-डोमेन) युद्ध क्षमता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम मान रहे हैं।
अरब सागर में नौसेना संस्करण का परीक्षण
पाकिस्तान ने हाल ही में अरब सागर में अपनी नई ‘तैमूर’ एयर-लॉन्च क्रूज मिसाइल के नौसैनिक संस्करण का परीक्षण किया। पाकिस्तान नौसेना के अनुसार इस परीक्षण का उद्देश्य समुद्री युद्ध क्षमता और लंबी दूरी से हमले की ताकत को बढ़ाना था। इससे पहले इसी मिसाइल का परीक्षण पाकिस्तान वायुसेना के लिए किया जा चुका है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि हालिया क्षेत्रीय तनाव के बाद पाकिस्तान अपनी सैन्य तैयारियों को नए सिरे से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
बदलती सैन्य रणनीति का संकेत
पाकिस्तानी रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण केवल एक नई मिसाइल का प्रदर्शन नहीं, बल्कि पाकिस्तान की बदलती रक्षा नीति का संकेत भी है। अब इस्लामाबाद पारंपरिक सैन्य ताकत के साथ-साथ स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमताओं और विभिन्न सैन्य शाखाओं के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दे रहा है। इसका उद्देश्य संभावित संघर्ष की स्थिति में लंबी दूरी से सटीक हमले करने की क्षमता को मजबूत करना है।
क्रूज मिसाइलों की सबसे बड़ी ताकत
क्रूज मिसाइलों की खासियत यह होती है कि वे कम ऊंचाई पर उड़ान भरते हुए लक्ष्य तक पहुंचती हैं, जिससे उन्हें पहचानना और रोकना अपेक्षाकृत कठिन हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में ऐसी मिसाइलें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पाकिस्तान के कुछ रक्षा थिंक टैंक का कहना है कि ‘तैमूर’ को भविष्य की बहु-क्षेत्रीय युद्ध रणनीति का हिस्सा बनाया जा सकता है, जहां वायुसेना, नौसेना और अन्य सैन्य इकाइयां मिलकर काम करेंगी।
600 किलोमीटर तक मार करने का दावा
पाकिस्तान की ओर से दावा किया गया है कि ‘तैमूर’ क्रूज मिसाइल की परिचालन सीमा लगभग 600 किलोमीटर है। वहीं निर्यात के लिए तैयार किए जाने वाले संस्करण की रेंज अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार 290 किलोमीटर तक सीमित रखी जाएगी। इस मिसाइल प्लेटफॉर्म का अब तक दो बार सफल परीक्षण किया जा चुका है। जनवरी में इसका वायु संस्करण मिराज-III विमान से दागा गया था, जबकि हालिया परीक्षण समुद्री लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया गया।
मल्टी-रोल हथियार प्रणाली के रूप में विकास
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान ‘तैमूर’ को केवल एक मिसाइल के रूप में नहीं, बल्कि बहुउद्देश्यीय हथियार प्रणाली के तौर पर विकसित कर रहा है। भविष्य में इसके विभिन्न संस्करण वायु, समुद्र और अन्य सैन्य अभियानों में इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इससे पाकिस्तान अपनी लंबी दूरी की हमलावर क्षमता को और व्यापक बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।