‘कुंभ के बिछड़े भाइयों को मिलन मुबारक’, भारत-अफगानिस्तान की बढ़ती नजदीकी पर पाकिस्तानी टिप्पणीकारों की तीखी प्रतिक्रिया
अफगानिस्तान के कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह उमरी के भारत दौरे और भारतीयों-अफगानों के “डीएनए एक होने” संबंधी बयान के बाद पाकिस्तान में तीखी राजनीतिक और मीडिया प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ पाकिस्तानी टिप्पणीकारों ने भारत और अफगानिस्तान के बढ़ते रिश्तों पर कटाक्ष करते हुए इसे क्षेत्रीय राजनीति से जोड़कर देखा है।
भारत दौरे के दौरान आया था डीएनए वाला बयान
अफगानिस्तान के कृषि मंत्री मौलवी अताउल्लाह उमरी ने 7 से 12 जुलाई के बीच भारत का आधिकारिक दौरा किया। नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भारत आकर उन्हें अपने लोगों के बीच होने जैसा महसूस हुआ और भारतीयों तथा अफगानों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक निकटता का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों का “डीएनए एक जैसा” है। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी।
पाकिस्तानी टिप्पणीकारों ने जताई नाराजगी
पाकिस्तान मूल के अमेरिकी कारोबारी और राजनीतिक टिप्पणीकार साजिद तरार ने इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि यह बदलाव आर्थिक और राजनीतिक हितों से प्रेरित है। बातचीत के दौरान उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि भारत और अफगानिस्तान की बढ़ती नजदीकी देखकर “कुंभ के बिछड़े भाइयों के मिलन” जैसा दृश्य नजर आता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय बन रहा है।
भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर पाकिस्तान की नजर
हाल के महीनों में भारत और अफगानिस्तान के बीच संपर्क बढ़ने के संकेत मिले हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार, मानवीय सहायता और कूटनीतिक संवाद को लेकर गतिविधियां तेज हुई हैं। दूसरी ओर, पाकिस्तान लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि भारत और अफगानिस्तान की नजदीकियां उसकी सुरक्षा चिंताओं को प्रभावित करती हैं। हालांकि भारत इन आरोपों को पहले भी खारिज करता रहा है।
क्षेत्रीय समीकरणों में बदलाव की चर्चा
विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों में भारत और अफगानिस्तान के बीच संवाद बढ़ना क्षेत्रीय समीकरणों का हिस्सा है। वहीं पाकिस्तान में इस पर हो रही प्रतिक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि इस घटनाक्रम को वहां रणनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। हालांकि, इन दावों और आरोपों पर संबंधित देशों की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं अलग-अलग रही हैं।