India-Pakistan: चीन की मदद से लॉन्च सैटेलाइट से उत्तर भारत पर नजर? नई रिपोर्ट से बढ़ी चर्चा
पाकिस्तान के नए अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट PRSC-EO3 को लेकर नई जानकारी सामने आई है। अमेरिकी स्पेस ट्रैकिंग फर्म COMSPOC के अनुसार, यह सैटेलाइट सामान्य कक्षाओं से अलग एक विशेष ऑर्बिट में स्थापित किया गया है, जिससे उत्तर भारत और पाकिस्तान के आसपास के क्षेत्रों की बार-बार निगरानी संभव हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने की पाकिस्तान की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
अमेरिकी ट्रैकिंग फर्म की रिपोर्ट में हुआ दावा
अमेरिकी स्पेस सिचुएशनल अवेयरनेस कंपनी COMSPOC के डेटा के आधार पर सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने अप्रैल 2026 में चीन की सहायता से PRSC-EO3 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लॉन्च किया था। यह सैटेलाइट ताइयुआन लॉन्च सेंटर से लॉन्ग मार्च-6 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी मौजूदा कक्षा पाकिस्तान के अन्य सैटेलाइट्स से अलग है, जिससे विशेषज्ञों का ध्यान इसकी ओर गया है।
पारंपरिक सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट से अलग है कक्षा
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के अधिकांश सैटेलाइट 97 से 98 डिग्री झुकाव वाली सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में काम करते हैं, लेकिन PRSC-EO3 को लगभग 38 डिग्री झुकाव वाली कक्षा में स्थापित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ऑर्बिट वैश्विक कवरेज के बजाय एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र की बार-बार निगरानी के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती है।
उत्तर भारत और पाकिस्तान के आसपास के क्षेत्र पर फोकस की संभावना
COMSPOC के विश्लेषण के अनुसार, यह कक्षा 20 से 40 डिग्री उत्तरी अक्षांश वाले क्षेत्रों पर बार-बार नजर रखने की क्षमता प्रदान करती है। इस दायरे में पाकिस्तान के अलावा भारत के उत्तरी और पश्चिमी हिस्से भी आते हैं। इसी वजह से कुछ रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सैटेलाइट सीमावर्ती क्षेत्रों की निगरानी क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इन दावों पर पाकिस्तान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति से जोड़कर देख रहे विशेषज्ञ
सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि आधुनिक युद्ध और खुफिया गतिविधियों में सैटेलाइट आधारित निगरानी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में पाकिस्तान अपनी स्वतंत्र निगरानी क्षमता मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे उसे रियल टाइम इमेजिंग और रणनीतिक जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है।
अंतरिक्ष तकनीक में बढ़ रही प्रतिस्पर्धा
दक्षिण एशिया में अंतरिक्ष तकनीक और निगरानी क्षमताओं को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है। भारत, चीन और पाकिस्तान तीनों देश अपने-अपने स्पेस प्रोग्राम को मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में किसी भी नए सैटेलाइट मिशन को केवल वैज्ञानिक उपलब्धि ही नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।