ऑनलाइन दवा के नाम पर ठगी: एक क्लिक और खाता खाली!
अगर आप ऑनलाइन दवा मंगाते हैं, तो सावधान हो जाएं। डीग पुलिस ने ऐसे साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो फर्जी लिंक और विज्ञापनों के जरिए लोगों के बैंक खाते खाली कर रहा था। ‘ऑपरेशन एंटीवायरस’ के तहत कई ठग गिरफ्तार किए गए हैं।
डीग पुलिस की बड़ी कार्रवाई, गिरोह का खुलासा
डीग पुलिस ने साइबर ठगी के खिलाफ बड़ा अभियान चलाते हुए 7 शातिर ठगों को गिरफ्तार किया और एक नाबालिग को निरुद्ध किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक शरण गोपीनाथ के. के निर्देशन में ‘ऑपरेशन एंटीवायरस’ के तहत की गई। आरोपियों के पास से 5 एंड्रॉयड मोबाइल बरामद हुए हैं, जिनमें ठगी से जुड़े कई अहम सबूत मिले हैं।
मोबाइल जांच में खुले ठगी के राज
कामां थाना और बृज नगर क्षेत्र में कार्रवाई के दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को मौके से पकड़ा। जब्त मोबाइल फोन की शुरुआती जांच में फर्जी वेबसाइट, लिंक और चैट रिकॉर्ड मिले हैं, जो इस गिरोह की संगठित ठगी का खुलासा करते हैं। इसके अलावा, लंबे समय से फरार चल रहे चार अन्य आरोपियों को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
दवा की होम डिलीवरी बना ठगी का हथियार
जांच में सामने आया कि आरोपी ऑनलाइन दवा की होम डिलीवरी का लालच देकर लोगों को जाल में फंसाते थे। सोशल मीडिया और वेबसाइट्स पर फर्जी विज्ञापन डालकर जरूरतमंद लोगों को आकर्षित किया जाता था। संपर्क करने पर उन्हें एक लिंक भेजा जाता या एडवांस पेमेंट के लिए कहा जाता, और जैसे ही लोग जानकारी भरते या भुगतान करते—उनके बैंक खाते से पैसे साफ हो जाते थे।
ऐसे बचें इस तरह की साइबर ठगी से
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान वेबसाइट या लिंक पर कभी भी अपनी बैंक डिटेल्स साझा न करें। दवाइयों के लिए केवल विश्वसनीय और प्रमाणित प्लेटफॉर्म का ही उपयोग करें। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑफर से सतर्क रहें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
‘ऑपरेशन एंटीवायरस’ जारी रहेगा
एसपी शरण गोपीनाथ ने स्पष्ट किया है कि जिले में साइबर अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है। ‘ऑपरेशन एंटीवायरस’ के तहत ऐसे गिरोहों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस का लक्ष्य है कि आम लोगों की मेहनत की कमाई को लूटने वाले हर अपराधी को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए।