कोर्ट आदेश की अवहेलना पर अलवर कलेक्टर कार्यालय का फर्नीचर कुर्क, भवन और गाड़ी कुर्की के भी निर्देश
अलवर में न्यायालय के आदेश की पालना नहीं करने पर सख्त कार्रवाई करते हुए अतिरिक्त मुंसिफ एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट (संख्या-2) के निर्देश पर जिला कलेक्टर कार्यालय का फर्नीचर कुर्क कर लिया गया। कोर्ट ने कलेक्टर कार्यालय भवन और सरकारी वाहन को भी कुर्क करने के आदेश दिए थे, लेकिन टीम के पहुंचने से पहले ही कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला सरकारी वाहन लेकर फील्ड के लिए रवाना हो गईं।
कार्रवाई के दौरान एडीएम सिटी बीना महावर और कलेक्टर के पीए बिजेंद्र सिंह राठौड़ ने कलेक्टर की अनुपस्थिति का हवाला देते हुए प्रक्रिया को रोकने का प्रयास किया। इस बीच डिक्रीधारी परिवादी बसंत पाराशर ने बताया कि नजारत विभाग के कार्मिक गिरीश गुप्ता द्वारा कोर्ट में शिकायत की चेतावनी देने के बाद कर्मचारियों ने एक बड़ी कुर्सी, एक टेबल और तीन साधारण कुर्सियां बाहर लाकर दीं। इन सामानों को मिनी सचिवालय के खाली पड़े कमरा नंबर 347 में रखकर सील कर दिया गया।
गौरतलब है कि न्यायालय ने मिनी सचिवालय स्थित कलेक्टर कार्यालय के भवन, सभी लोहे व लकड़ी के फर्नीचर और कलेक्टर की सरकारी गाड़ी (RJ02UA9420) को कुर्क करने के आदेश जारी किए थे। आदेश की सूचना पहले ही कलेक्टर कार्यालय को मिल चुकी थी, इसके बावजूद टीम के पहुंचने से पहले ही वाहन को बाहर ले जाया गया।
इस मामले में कलेक्टर डॉ. आर्तिका शुक्ला का कहना है कि यह प्रकरण आयुर्वेद विभाग, जयपुर से संबंधित है और न्यायालय के आदेशों की पालना की जा रही है।
यह है पूरा मामला:
परिवादी के अधिवक्ता विक्रांत माथुर के अनुसार, “बसंत कुमार बनाम राज्य सरकार” मामले में वर्ष 2024 में कोर्ट ने नियुक्ति के आदेश दिए थे। दरअसल, वर्ष 1996 में आयुर्वेद विभाग द्वारा 158 कंपाउंडर पदों पर भर्ती निकाली गई थी, जिसमें मेरिट के बजाय सीनियरिटी के आधार पर नियुक्तियां दी गईं। जबकि परिवादी की मेरिट 58.10 प्रतिशत थी, जो सामान्य वर्ग की 50.27 प्रतिशत कटऑफ से अधिक थी।
एडीजे कोर्ट नंबर-2 ने परिवादी के पक्ष में नियुक्ति के आदेश दिए थे। इसके खिलाफ विभाग द्वारा दायर अपील को जनवरी 2026 में हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इससे पहले 17 अप्रैल को आयुर्वेद विभाग, बुद्ध विहार स्थित निदेशक कार्यालय में भी कुर्की की कार्रवाई की जा चुकी है।